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चौथे खंभे के ढपोरशंखी !!

आज की दुनिया में हर रोज, हम एक नई सुबह की कामना के साथ बिस्तर से उठते हैं और ऐसे में यदि कोई कह दे कि आज का दिन बड़ा अच्छा गुज़रेगा तो बस उसके मुंह में घी शक्कर डालकर जीवन के अग्निपथ पर चल देते हैं. हमारे इस दिवास्वप्न की पूर्ति के लिए, हमारे देश का
 
सम्वेदना के स्वर
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चौथे खम्बे में लगी दीमक – भाग 2.

बड़ी पुरानी बात है कि आप अगर एक उँगली किसी की तरफ उठाते हैं तो चार उँगलियाँ खुद ब खुद आपकी तरफ उठ जाती हैं. ये भी कहा जाता है कि कमरे के अंदर आराम कुर्सी पर बैठकर आप किसी पर दोषारोपण कर सकते हैं, लेकिन जब वास्तविकता से आपका सामना होता है तो सारे आदर्श धरे
 
SAMVEDANA KE SWAR
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चौथे खम्बे में लगी दीमक-भाग 1

एलेक्ट्रोनिक मीडिया का प्रादुर्भाव भारतीय समाज में मात्र दो दशक पुराना है. ऐसे में आज का मीडिया 20-22 वर्ष का वो दिग्भ्रमित शहरी युवा प्रतीत होता है जो मात्र और मात्र उत्तेजना से भरा है. न तो उसे भान है अपनी 5000 वर्षों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर का और न ही
 
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