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हास परिहास : स्त्री और पुरूषों के ख़ास नियम

  --->>> आदम और हव्वा के नियम <<<--- 1. नियम हमेशा स्त्रियाँ ही बनाती हैं. 2. बिना किसी पूर्व सूचना के इन नियमों में कभी भी परिवर्तन किया जा सकता है. 3. कोई भी पुरुष सभी नियमों को कभी भी नहीं जान सकता है. 4. यदि स्त्री को शंका होती
 
Raviratlami
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किस-किस को एतराज है - अन्तर सोहिल

सभी कहते हैं कि "पति-पत्नी एक ही गाडी के दो पहिये होते हैं,एक भी पहिया खराब हो जाये तो गाडी चल नहीं सकती"तो क्या…………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………स्टेपनी रखनी
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मेरे बच्चे...तुम्हारे बच्चे....हमारे बच्चे....

ब्लॉग पर तैर रही साम्प्रदायिकता और तनाव से कुछ बाहर आने की कोशिश करिए जनाब.... लीजिये अभी कुछ और नहीं एक हल्का-फुल्का चुटकुला ही पढ़िए.....ठीक है न॥!!!=====================================एक महिला के दो बच्चे थे और उसका पति नहीं था। एक पुरुष के दो बच्चे
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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लड्डू की दूसरी कक्षा का पहला पोस्ट----धर्म के तोता -रटंत विद्वानों को चुटकुलों की गुरू दक्षिणा ..मूर्ख दिवस पर..

एकविश्व के सभी  धर्मों के एक प्रकांड विद्वान  अपने स्टडी रूम में अकेले बैठे थे....थोड़ी देर  बाद अंदर कमरे से जोर जोर से बहस की आवाज आने लगी....बाहर से एक  शिष्य अंदर आया......देखा कि इंटर –नेशनल गुरू जी  सभी धर्मों (हिंदू,
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हास-परिहास : माइक्रोसॉफ्ट के नए अध्यक्ष की तलाश में!

बिल गेट्स ने एक विशाल साक्षात्कार के जरिए माइक्रोसॉफ़्ट यूरोप के लिए एक नए अध्यक्ष की भर्ती के लिए एक आयोजन किया. एक बड़े कमरे में 5000 से अधिक उम्मीदवार इकट्ठे हुए. इनमें से एक उम्मीदवार अरुण है जो कि एक भारतीय (मुंबई का) लड़का है. बिल गेट्स ने सभी
 
Raviratlami
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मुझे तो मजबूरी में करना पडता है

एक कहावत है -"अपने बच्चे और पडोसी की घरवाली सबको अच्छे लगते हैं"एक बार फत्तू चौधरी घर आये तो देखा की उनका मित्र रलदू उनकी पत्नी का आलिंगन किये हुए है। फत्तू को देखते ही दोनों घबरा गये और सकपका कर अलग-अलग खडे हो गये। फत्तू चौधरी - अरे रलदू, तू भीरलदू
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मैं अब कर लुँ क्या?

डाक'साब, नमस्ते"नमस्ते, नमस्ते। आईये, बैठिये।"डाक'साब, लगता है आपने मुझे पहचाना नहीं"ह्म्म्म...याद तो नहीं आ रहा। आप पहले भी क्लीनिक में आ चुके हैं क्या?"अरे डाक'साब, मैं पिछले साल आया था ना आपके पास, इलाज के लिये"अच्छा, क्या हुआ था?"मुझे हल्का सा बु
 
विजय वडनेरे
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अपना कान अपने दांतों से दबाने की तरकीब - थोड़ी सी मस्ती हो जाए!!!

कई बार ऐसा होता है और सभी के साथ ही ऐसा होता होगा कि जब मन में मस्ती करने का ख्याल आता होगा। अपने कार्य, अपने पद, अपनी प्रतिष्ठा, सामाजिक प्रस्थिति के कारण कई बार हम अपनी जीवन-शैली को कृत्रिमता का आवरण ओढ़ा देते हैं। खुल कर, मुँह फाड़कर हँसना चाहते हैं
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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कपडे तो पहनती नहीं और लौंड्री का बिल एक लाख का

एक चुटकुला, उससे पहले एक निवेदन............. इस चुटकुले को बस चुटकुले की तरह ही लें, हमारी पुरानी पोस्ट के आधार पर आकलन न करें। अभी-अभी हमारे मोबाइल पर हमारे एक मित्र का संदेश आया, पढ़ कर हँसी आई तो सोचा आपको भी हँसवा दें ========================== एक
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
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किफायती दिवस पर किफायती पोस्ट - एक पंक्ति का चुटकुला

समाचार-पत्रों के माध्यम से पता चला कि आज किफायती दिवस है। (सही क्या ग़लत क्या, पता नहीं?) इस कारण ये किफायती पोस्ट - एक चुटकुला - "एक बुढ़िया बचपन में ही मर गई."
 
डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर