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चिड़ियों की तरह खाइये और जंगल बढ़ाइये!

दुधवा लाइव डेस्क* बायोलॉजिकल कन्जर्वेशन न्युजलेटर की एक रपट के मुताबिक "चिड़ियों की तरह खाइये, और जंगल बढ़ाइये" कथन के बड़े गहरे मायने उजागर किए, सीधी बात ये है, कि मानव प्रजाति को छोड़कर सभी जीव प्रकृति प्रदत्त वृत्तियों के मुताबिक अपना जीवन जीते है, और यही
 
दुधवा लाइव
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समीर लाल समीर ( उडन-तश्तरी) जी की बाल-कविता - चिड़िया!!!!!

नमस्कार बच्चो , उस दिन हमें अमर अंकल नें बताया कि उन्होंने नन्हामन पर उडन-तश्तरी उतारी है और हम सब उसमें बैठकर आसमान की सैर भी कर आए । अमर अंकल नें इतना तो बताया कि उन्हें इसमें बहुत मेहनत करनी पडी , अब यह समझ में आया कि उस उडन-तश्तरी को उतारने में इतनी
 
सीमा सचदेव
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कल गौरैया दिवस है...

क्या हमें अपना बचपन याद है ? क्या वो भूरी छोटी सी चिड़िया भी याद है जो अक्सर ही हमारे आँगन में फुदकती रहती थी ? याद करके देखिये कि कितने दिनों से आपने उस छोटी सी गौरैया को नहीं देखा है ? कुछ याद आया ? वो आँगन में उसे पकड़ने के लिए तरह तरह के उपाय करना फिर
 
डा०आशुतोष शुक्ल
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चिड़िया

प्यार महोब्बत चिड़िया ऐसी,जिसके सर पे दो दो चोंच !अपना अपना करने वाले ,मिलते ही मौका लेते नोंच !आह : तो भरते तेरे दर्द की ,होता अपनी कमर पे हाथ !प्यार से आंसू पोछने वाले ,पीठ के पीछे मारें लात !भावनाओं का दाना खा खा ,ये चिड़िया फल फूल रही है ,बोली बदल सभी
 
sanjeev kuralia