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बच्चों को अंतर्मुखी कैसे बनाया जाए?

                समाप्‍त :::            सौजन्‍य से – ओशो न्‍यूज लेटर
 
राजेंद्र त्‍यागी
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ओशो चिन्‍तन

बच्चों को अंतर्मुखी कैसे बनाया जाए? गतांक से आगे::::फ़्रायड एक बड़ा मनोवैज्ञानिक हुआ। अपनी पत्नी और अपने बच्चे के साथ एक दिन बगीचे में घूमने गया था। जब सांझ को वापस लौटने लगा, अंधेरा घिर गया, तो देखा दोनों ने कि बच्चा कहीं नदारद है। फ़्रायड की पत्नी
 
राजेंद्र त्‍यागी
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बच्चों को अंतर्मुखी कैसे बनाया जाए?

पहली तो बात यह है कि बच्चों को कैसा बनाया जाए, इसकी बजाय हमेशा यह सोचना चाहिए, खुद को कैसा बनाया जाए। हमेशा हम यह सोचते हैं कि दूसरों को कैसा बनाया जाए। और मैं यह भी आपसे कहूं कि वही व्यक्ति यह पूछता है कि दूसरों को कैसा बनाया जाए, जो खुद ठीक से बनने में
 
राजेंद्र त्‍यागी
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इस जीवन में मैंने दुख ही दुख क्यों पाया है?

दुख ही दुख अगर पाया है तो बड़ी मेहनत की होगी पाने के लिए, बड़ा श्रम किया होगा, बड़ी साधना की होगी, तपश्र्चर्या की होगी! अगर दुख ही दुख पाया है तो बड़ी कुशलता अर्जित की होगी! दुख कुछ ऐसे नहीं मिलता, मुफ्त नहीं मिलता। दुख के लिए कीमत चुकानी पड़ती
 
राजेंद्र त्‍यागी