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जगजीत सिंह - चित्रा सिंह की चुनिन्दा - अविस्मरणीय गज़लें

बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी ग़म बढ़े आते हैं कातिल की निगाहों की तरह तुम छुपा लो ऐ दोस्त गुनाहों की तरह किसी रंजिश को हवा दो कि मैं जिन्दा हूँ अभी आये हैं समझाने लोग
 
Aflatoon
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तारीफ उस खु़दा की जिसने ज़हाँ बनाया: जगजीत सिंह

जगजीत- चित्रा की जोड़ी ने भी क्या खूब गज़लें गाई है, ज्यादातर तो आपने सुनी होगी पर कुछ ऐसी भी है जो आजकल कहीं सुनाई नहीं देती। अब अति वाचालता भी ठीक नहीं हम तो बस चुप ही रहेंगे आप ही फैसला कीजिये... तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहां बनाया, कैसी ज़मीं बनाई क्य
 
सागर नाहर