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मैं तुझ जैसों के मुँह नहीं लगता-चक्कर घनचक्कर "चिट्ठी चर्चा" (ललित शर्मा)

स्वस्थ रहने के लिए आराम करना भी जरुरी है. इससे नयी उर्जा मिलती है काम करने के लिए. हम भी छुट्टी पर थे, लेकिन आराम करने का समय ही नहीं मिला. अभी कुछ आराम किया. पर भाजपा आराम करने के मूड में नहीं है. इंदौर में भाजपा का सम्मलेन चल रहा है. इस सम्मलेन में
 
ललित शर्मा
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यह रेखा ग़रीबों की गर्दन से गुज़रती है..!! "चिट्ठी चर्चा "

ब्लाग जगत में हो रही उठा पटक से गुरु द्रोण मिसिर जी हैं व्याकुल, कल उन्होंने त्याग पत्र का एलान कर दिया. इस एलान को सुनकर एकलव्य को भी क्रोध आ गया है. क्योंकि गुरु जी हैं व्यथित और चेला है पोल खोलने के लिए उपस्थित. एकलव्य ने भी कह दिया है. वह जब
 
ललित शर्मा
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आईये इसे पढ़िए यहाँ बहुत कुछ खास है-(चिट्ठी चर्चा)

ये समय है. समय रथ पर सवार हो कर हम यात्रा करते हैं. वर्त्तमान से भविष्य की ओर जाते हैं. आज वर्तमान में जीते हुए भविष्य की चिंता करते हैं. वर्तमान के कर्म ही भविष्य का निर्धारण करते हैं. आज समय चक्र पर फिर हम हैं साथ. हमारा समय रथ भी तैयार है. सारथि भी
 
ललित शर्मा
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ब्लोगजगत का आईना : चर्चा दो लाईना (चिट्ठी चर्चा )

शुकल जी ने जब चिट्ठा चर्चा की शुरूआत की होगी ,.तो जरूर ही ये उनके बहुत से धमाकेदार आडिईया में से एक होगा..महेन्द्र भाई ने इसे साप्ताहिकी का रूप दिया...हमने भी हंसते खेलते जो बन पडा ठेल दिया..और अब तो आदत बन गयी है..अब चच्चा टिप्पू जी ने और पंकज जी ने
 
अजय कुमार झा
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कई देखे कई पढ डाले, आज की चर्चा आपके हवाले (चिट्ठी चर्चा )

आज सीधे सीधे चर्चा का मजा लिजीये........... बकलमखुद की डायरी में अद्भुत फ़साना, आज फ़िर देखिये वकील साहब का आशियाना। मुकेश जी ने लिखी कविता आप देखिये कैसे, ये कहते हुए कि हाय हम तो नहीं थे ऐसे । नेताओं की गंदी राजनीति का करने को हिसाब किताब, राज भाई
 
अजय कुमार झा
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चर्चा करके जांचेंगे , अब रोज चिट्ठिया बाचेंगे ( चिट्ठी चर्चा वाली )

इक नए प्रयोग से रहे थे खुद को जांच, डरते डरते पहली चिट्ठी यूँ रहे थे बांच, खूब मिली शाबाशी, चटके लगे कुल पांच, झाजी का मन मयूर रहा ,,बिन बदली के नांच तो सोच लिए अब ऐसे ही पोस्टवा सबको जांचेंगे, जब भी मिला मौका, हम रोज चिट्ठिया बांचेंगे .. तो लीजिये प
 
अजय कुमार झा