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पाती मेरे नाम की !

अचानक बहुत दिनों बाद एक चिट्ठी के रूप में पोस्ट-कार्ड को पाकर जो आनंद मिला,वह कम-से-कम 'इंटरनेटी 'दुनिया की समझ के बाहर है। हमारे एक साथी हैं,जिनसे अब मुलाक़ात भी यदा-कदा होती है,बातचीत मोबाईलवा पे होती रहती है। यह चिट्ठी जो आई , उनके पिताजी की तरफ से आई
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
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प्रिये तुम

प्रिये ,यह खत नहीं है.यह मेरे हृदय में उठ रहे विचारों का ज्वार है,दिमागी तारों को हिला देनेवाली एक कंपन है,धमनियों में बह रहे रक्त-कणों का आवेग है,एक साथ कई भावनाओं के मिलने से बना एक शब्द है.इसलिये प्रिये तुम मेरे दिल की तरह इसके भी टुकङे कर कूङेदान में
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चाचा की चिट्ठी

दिनांक 14.11.2009 मेरे प्यारे बच्चोंआज तुम सभी बाल-दिवस के रुप मे मेरा जन्मदिन मना रहे हो-यह मेरे लिये खुशी की बात है।बच्चे जो राष्ट्र के भविष्य होते है-आज वर्तमान बनकर भारत के निर्माण मे अपना योगदान दे रहे है.इससे बढकर खुशी की बात क्या हो सकती है.जैसा