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तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये। हाल ऐ दिल!

यूँ सोचता हूँ के कभी मिलूँ,तुझसे अचानक कहीं,खौफ़ बस इतना है,के तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये।
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तुम चले क्यूँ नही जाते ? : यूँही चलते चलते

यूँ फूल भी ज़रा छुपकर मुस्कुराने लगे हैं,भँवरे भी इस बाग़ से बचकर जाने लगे हैं,तुम यहाँ से उठकर चले क्यूँ नही जाते?तुम्हे देखकर नज़ारे भी शर्माने लगे हैं।