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चाँद हुआ गुलज़ार !

चार महीने, इकतालीस फॉलोअर, पैंतालीस पोस्ट, टिप्पणियाँ और इससे भी कहीं ज़्यादा लोगों से बने रिश्ते... ये आँकड़े नहीं हैं, यह एक टीस है, जो जितना चुभती है, उतना ही हमारी सम्वेदना के स्वर मुखर होते हैं. यह एक बड़ा ही नाज़ुक एहसास है, जब भी गुज़रता है हमारे दिल
 
सम्वेदना के स्वर
टैग: चांद