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मथुरा से लौटकर.....

कहानी रामदास से शुरू नहीं होती है फिर भी कर रहा हूं।रामदास..ये जनाब बिल्कुल नहीं चाहते थे कि महुआ न्यूज की ओबी वैन वृंदावन की संकरी गलियों में कहीं फिट हो जाए और हम लाइव देने के अपने मंसूबे में कामयाब हो जाएं। बिल्कुल भी नहीं। दरअसल होली वाले दिन हमें
 
अमृत उपाध्याय
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यह दीप अकेला

अज्ञेय की यह कविता वैदिक काल के जुझारू मानव के संघर्ष की याद दिलाती है जो आत्मविशवास से भरपूर मगर प्रकृति पूजक और उसका सहचर है ....इसलिए जब भी सतत विकास की बात होगी तो छायावाद के मानवतावादी तेवर के साथ प्रकृति-मानव के निर्मल रिश्तो के समर्थक अज्ञेय क
 
भावना
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कृष्ण का प्रतिबिम्ब क्राईस्ट

कृष्ण और येशु दोनों अवतारी पुरषों के जीवन में अद्भुत समानता मिलती है....कृष्ण का जन्म जहाँ कारागार में होता है...वहीं येशु जेरुशलम के एक अस्तबल में पैदा होते है....कृष्ण अगर गोपालक हैं जीसस को गड़रियों का ईश्वर कहा गया। वासुदेव पुत्र कृष्ण को देवकी क
 
भावना
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बस एक न्यू इयर चाहिए हैप्पी होने के लिए

ग्रेगरियन कैलेंडर के मुताबिक साल २००८ अब से चंद दिनों के बाद अलविदा कहने वाला है और तमाम देशवासी इसे पूरे हर्षौल्लास से मनायेगे....चाहे २६/११ की स्मृतियाँ अभी धुंधली नही हुई हो....हो भी नही सकती ....सियासत के हलकों में पाकिस्तान के साथ जंग छिड़ने के
 
भावना
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प्रलय का लोकल ब्रोडकास्ट

कोई तीस साल पहले की बात है। जैसे अभी हॉलिवुड की फार्म्युला फिल्म 2012 को लेकर उठे हल्ले ने कई लोगों की हालत खस्ता कर रखी है, कुछ-कुछ वैसा ही हाल हमारे गांव का था। रेडियो में बराबर खबरें आ रही थीं कि स्काईलैब नाम की कोई बड़ी भयानक चीज धरती पर गिरने वा
 
चंद्रभूषण
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ज़हन में कौंधती एक सोच...

कहते हैं कि दुनिया में इंसानों को कभी भी मन माफ़िक चीज़ें नहीं मिलतीं क्योंकि इंसान एक सामाजिक प्राणी है. सामाजिक प्राणी होने का इंसानों के लिए यह दायरा बहुत सोच समझकर बनाया गया है. अगर इंसानों को उनकी मांग के हिसाब से चीज़ें मिलने लगें तो यह दायरा सिमट
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बिल्डर ब्रोकर का कॉमनवेल्थ

आलम में इंतखाब दिल्ली शहर धूल और बारिश में बारी-बारी भच-भच करता कॉमनवेल्थ नाम के अगम-अगोचर गोदो का इंतजार कर रहा है। लगभग हर चौराहे पर फ्लाईओवर या तो बन गए हैं या बनने की प्रक्रिया में हैं। सड़कें खुदी हुई हैं। बगल में पड़ा ढेर सारा लोहा सड़ रहा है।
 
चंद्रभूषण