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डूब जाना ही गर इश्क की तहजीब हैं तो या रब ! मुझे डूबने में लुत्फ़ की तौफिक फरमा दे....मधु

मधु गजाधर का नाम सामने आते ही दिल और दिमाग में एक साथ बहुत कुछ दिखाई देने लगता है बिलकुल उसी तरह जैसे अचानक अँधेरी रात में आसमान से बिजली कोंध उठे और पल भर के लिए एक साथ बहुत कुछ दिख जाए. उसके बाद फिर अन्धेरा. अन्धेरा मैंने इस लिए कहा की मधु के बारे कुछ
 
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हाथ में बंदूक मन में प्रेम

कौन कहता है कि सेना केवल बंदूक और तोप से बात करती है या बस जंग कि भाषा ही बोलती है....तस्वीर में आप देख रहे हैं एक सेनिक को ? कितने प्यार से हाथ मिला रहा है किसी बुज़ुर्ग के साथ. यह अमेरिकी सेना का यह सेनिक
 
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कभी तो मौसम बदलेगा

बात बहुत पुरानी है। उन दिनों एक पंजाबी गीत बहुत ही लोकप्रिय हुआ था जिसके बोल थे :  जदों मेरी अर्थी उठा के चलनगे,  मेरे यार सब हुम हुमा के चलनगे.... अर्थात जब मेरी शवयात्रा चलेगी तो मेरे सभी मित्र तो साथ चलेंगे ही, मेरे
 
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सब कुछ आपका और आप हमारे

बस कुछ शब्द.....या दो चार पंक्तियां.....या तो अच्छा भला दिल उदास हो जाता....या फिर वह उदासी भी दूर हो जाती जिसके दूर होने की बात कभी सपने में भी नहीं सोची जा सकती. जी मैं बात कर रहा हूं मोबाईल पर आते छोटे छोटे संदेशों की. कुछ लोग इसे अब भी आधी आधी
 
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क्या कहती है दिल की धड़कन ?

क्या कहती है दिल की धड़कन ? शायद यही वह सवाल है उस औरत के मन में जिस के बच्चे को स्टेथस्कोप लगाकर डाक्टर  पता लगा रहा है कि क्या वह पूरी तरह स्वस्थ तो है न ? हैती में वहां के सभी लोगों को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान
 
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विदेशों में भी बढ़ रहा है पशु धन से प्रेम...!

कुछ समय पूर्व मैंने कहीं पढ़ा था एक बहुत ही तीखा व्यंग्य. शायद किसी ने मुझे एस एम एस भेजा था या मेल. बात आई गयी हो गयी. लिखा था एक आदमी ने एक गाये को देखा और गाये ने आदमी को देखा. आदमी ने उसे देख कर कहा गाये. लेकिन गाये ने आदमी को आदमी नहीं कहा.
 
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बंदूक, बच्चे और सैनिक

बंदूक और बच्चे...बात में कोई तालमेल नहीं लगता. पर होता है बहुत गहरा संबंध. जब सैनिक जंग के मैदान में अपनी जान की बाज़ी लगा रहा होता है तो उसे अपने माता पिता भी याद आते हैं, भाई बहन भी, पत्नी भी और बच्चे भी. ऐसा हर जंग के मैदान में होता है. उन पलों में जब
 
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करो तलाश तो हर बात नज़र आती है...!

केवल एक ही परीक्षा पर काम आने वाले कागज़ का उत्पादन करने के लिए ही कम से कम 15 पेड़ों को मिटा दिया जाता है. उन पेड़ों को जो हमें फल देते हैं, कड़कडाती हुई  धुप में छाया देते हैं, और बहुत से कामों में आने वाली लक्कड़ी देने के  साथ साथ हमारे
 
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एक और मासूम ने जीत ली मौत से जंग

एक और मासूम ने जीत ली मौत से जंग. बर्फीले तूफानों ने अफगानिस्तान में भी अपना कहर दिखाया. जहां बरफ्बारी से बहुत से लोग दब गए वहां हिम स्खलन से भी इस तूफ़ान की मार कई गुना बढ़ गयी. बहुत से लोग अपनी मोटर गाड़ियों सहित पहाड़ी चट्टानें खिसकने से गहरी गहरी
 
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हैदराबाद में होगा 18 फरवरी को विशेष सभा का आयोजन

पुणे में बम धमाका करके आतंकवादियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है की वे जब चाहें, जहां चाहें वहीँ पर ही मौत का खेल बहुत ही आसानी से खेल सकते हैं. इस धमाके के बाद कई नए पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा में आये  हैं. इस बम को किस ने वहां रखा,
 
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आओ कुछ सीखें अमेरिका से....!

आपदा कभी भी और कहीं भी आ सकती है. विनाशक शक्ति जब विनाश पर उतारू होती है तो किसी का लिहाज़ नहीं करती. पर इन आपदाओं का सामना करने वाले लोग कई बार इतने बहादुर और समझदार होते हैं कि अपनी तदबीरों से वे अपनी तकदीरें बादल देते हैं. हाल ही में मुझे अमेरिका
 
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यूं होता है तूफानों का सामना...!

हाल ही में मुझे विदेश से जो खबरें प्राप्त हुईं उनमें एक ख़ास रिपोर्ट भी थी. अमेरिका के Air Force Lt. Col. Ellen Krenke की इस खास रिपोर्ट में बताया गया था कि कोलंबिया और कुछ अन्य इलाकों में दूसरे खतरनाक बर्फीले तूफ़ान की चेतावनी
 
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Punjab Screen

टीवी चैंनेल के लिए काम के दौरान इतना वक्त भी नहीं मिलता था कि कोई पूरी अखबार या पूरी किताब एक ही बैठक में पढ़ ली जाये. सुबह जाना और फिर आने का कुछ पता नहीं. कभी आधी रात और कभी उसके भी बाद. ....चलो रात को आकर पढ़ेंगे.... उस अख़बार या किताब को सम्भाल
 
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हजारों कुर्सियां ऐसी कि हर कुर्सी पे दम निकले, जो इस पे बैठ कर खुद से उठे हों ऐसे कम निकले

चलते चलते   याद आ गयी तो उठ कर डायरी  के पन्ने उलटे. एक पन्ने पर नज़र अटकी तो देखा  तारीख थी 18 मार्च और साल था 1996. दिल्ली  में  42 वां शंकर  शाद  मुशायरा था जिसमें पाकिस्तान से डाक्टर अहमद फ़राज़ भी आये हुए थे और
 
Rector Kathuria
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एक मिसाल और

इस में कोई संदेह नहीं कि आजकल बहुत से अन्य क्षेत्रों की तरह मीडिया में भी लड़किओं का वर्चस्व बढ रहा है पर इसके बावजूद अभी भी उन लड़किओं की संख्या कम नही हो पाई जो हालात की आंधी में बह कर मजबूरिओं के सामने घुटने टेक कर गुमनामी की जिंदगी में खो जाती है
 
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पंजाबी और बिहारी

कुछ सालों पहले मैं दिल्ली में था. वहां एक चलन है कि मजदूर टाइप के आदमी को बिहारी बुलाते हैं, साथ ही यह संबोधन गाली के रूप में भी प्रयोग होता है. इस शब्द का प्रयोग यदि आप गौर से देखेंगे तो ज्यादातर हरियाणवी या पंजाबी लोग करते हुए मिलेंगे. ऐसा इसलिए कि
 
कौतुक
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कुछ नया नहीं

अभी अभी श्रीमती जी स्नान कर के निकलेंगी, फिर मेरा क्लास लेंगी. “अभी तक आप यहाँ बैठे हैं, नहाये नहीं?” Posted in चलते चलते, मशखरी, हिन्दी Tagged: चलते चलते, मशखरी, मियां-बीवी, couples, Jokes
 
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