मैं और हस्तकला (एस.यू.पी.डब्ल्यू.)(व्यंग्य/कार्टून)
बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था। पढ़ा क्या करता था बस यूं ही जब घर बैठे-बैठे बोर हो जाता था तो स्कूल तक चला जाता था । वैसे स्कूल जाना मेरी मजबूरी भी थी और शौक भी । मजबूरी इसलिये क्योंकि हमारे खनादान में सभी पढ़े-लिखे थे इसलिये मुझे [...
Dec 29 2009 11:41 AM



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