पसंद करें
0
नापसंद करें

मैं और हस्तकला (एस.यू.पी.डब्ल्यू.)(व्यंग्य/कार्टून)

बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था। पढ़ा क्या करता था बस यूं ही जब घर बैठे-बैठे बोर हो जाता था तो स्कूल तक चला जाता था । वैसे स्कूल जाना मेरी मजबूरी भी थी और शौक भी । मजबूरी इसलिये क्योंकि हमारे खनादान में सभी पढ़े-लिखे थे इसलिये मुझे [...
 
K M Mishra