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तारों की बरात है------
तारों के बारात हीरों जैसे जग-मग करते , तारों की बारात है । मेवे वाली खीर से भरी, जैसे बड़ी परात है । सुघड़ अंगूठी में मोती सा, चन्दा सजा आकास है । चांदी के दर्पण सी झिल मिल, यह पूनम की रात है । पपीहा भी अब पीउ न बोले, ना बदली की आस है । मोर -मोरनी नृ
Dec 09 2009 06:26 PM



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