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तारों की बरात है------

तारों के बारात हीरों जैसे जग-मग करते , तारों की बारात है । मेवे वाली खीर से भरी, जैसे बड़ी परात है । सुघड़ अंगूठी में मोती सा, चन्दा सजा आकास है । चांदी के दर्पण सी झिल मिल, यह पूनम की रात है । पपीहा भी अब पीउ न बोले, ना बदली की आस है । मोर -मोरनी नृ
 
Dr. shyam gupta
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हां ! सेलरी चली गयी चन्दे में .....!

हां ! सेलरी चली गयी चन्दे में । बहुत ही अजीब महसूस होता है । तरह तरह के लोग होते हैं ये चन्दे वाले । न जाने कौन सा पाठ पढ़ कर चन्दा काटने की कारगुजारी शुरू कर देते हैं । इनका बाजार हमेशा गर्म होता है । कभी भी खाली नहीं रहते । इनका मौसम सदाबहार है । आ जाते
 
हेमन्त कुमार
टैग: चन्दा