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मेरे तट पर आते रहते है ज्वार भाटे ....

जीवन की राह भी कैसी कैसी पगडंडियों से गुजरती है  - कभी धुप तो कभी छाँव. कभी इतने काम कि फुरसत न मिले ब्लॉग लिखने की भी.  आज सुबह से शाम तक बहुत व्यस्त रहा और ब्लॉग लिखने या पड़ने का कतई समय नहीं मिला.  अभी लग रहा है कि बहुत कुछ है अधूरा !!
 
राम त्यागी
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जुदा होंगे पर मौत के बाद..

न तुमने कुछ कहा उस तूफान के बादन मैंने ही कुछ पूछा उस तूफान के बादएक दुसरे का हाथ पकड़े एक अंधेरे में साथ बढते गए हमखामोशी चारों तरफ़ पसरी थी पर दिलों का तूफान कहाँ खामोश थाज़िन्दगी किस मुकाम पे ले आई थी हमेंके एक दुसरे को थामे अलग होने की कोशिश कर रहे थे