ग़ज़ल-12
पूरे सात वर्ष अवसाद में रहने के पश्चात इस वर्ष इस ग़ज़ल से मेरे साहित्यकार / ग़ज़लकार की नयी पारी शुरू हुई. अपनी बुनावट में साधारण होने के बावज़ूद मेरे लिये इस ग़ज़ल के इस रूप में बहुत माइने हैं.- ग़ज़ल-12.पहले से बेहतर हूं मैं.सन्डे है घर पर हूं मैं..दुनिया से
Sep 13 2009 11:34 AM



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