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कहां गई गौरैया की चहचहाट
याद है, जब छोटे थे, तब स्कूल जाने के लिए अलह सुब्बह उठाया जाता था, यह कहकर देखो चिडिया आई, देखो कौआ आया, वो देखो मोर आया। घर की मुण्डेर पर छोटी सी चिडिया चहकती रहती, और उठकर स्कूल के लिए तैयार होने लगते। गरमी में कोयल की कूक मन को अलग ही सुकून देती थी।
May 25 2010 02:16 AM



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