असर तो है .........!!
खेतों में सरसों का रंग और चटक हुआ लहराया मेरा आँचल चुनरी का कसूमलगालों के भंवर मुस्कुराते रहे गुलाबीरंगत चेहरे की हुई और सुर्ख रतनारीकदम नापते रहे दूरियां आसमानीरंग सुनहरा बिखेरती रही चांदनीसिलबट्टे पर चढ़ी रही मेहंदी हरियाईचक्की में पिसता रहा मक्का
Mar 03 2010 04:50 AM



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