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असर तो है .........!!

खेतों में सरसों का रंग और चटक हुआ लहराया मेरा आँचल चुनरी का कसूमलगालों के भंवर मुस्कुराते रहे गुलाबीरंगत चेहरे की हुई और सुर्ख रतनारीकदम नापते रहे दूरियां आसमानीरंग सुनहरा बिखेरती रही चांदनीसिलबट्टे पर चढ़ी रही मेहंदी हरियाईचक्की में पिसता रहा मक्का
 
वाणी गीत
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जल गई है फ़स्‍ल सारी [ग़ज़ल] - गौतम राजरिशी

रचनाकार परिचय:- मेजर गौतम राजरिशी का जन्म १० मार्च, १९७६ को सहरसा (बिहार) में हुआ। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी व भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत वर्तमान में आप कश्मीर में पदस्थापित हैं। गज़ल व हिन्दी-साहित्य के शौकीन गौतम राजरिशी की
 
साहित्य-शिल्पी
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उनका हर एक बयान हुआ [मेजर गौतम राजरिषी भारत-पाक सीमा पर गोलीबारी में घायल हुए हैं, प्रस्तुत है उनकी ग़ज़ल, उनके ही सम्मान में] - गौतम राजरिशी

यह समाचार चिंतित कर रहा है कि साहित्य शिल्पी "मेजर गौतम राजरिषी" भारत पाक सीमा पर हुई गोलीबारी में घायल हो गये है। साहित्य शिल्पी परिवार गौतम जी के जज्बे को सलाम करता है। एक शायर केवल नर्म दिल ही नहीं रखता वरन गर्म हौसला भी रखता है इसी लिये देश के दु
 
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बारिश, बर्फ, ड्यूटी और...

बारिश पसंद है मुझे। बहुत पसंद है। जाने कितनी स्मृतियाँ एकदम से सर उठायें चली आयी हैं...."जाओ, कमबख्तों मैं अभी ड्यूटी पर हूँ"। बारिश पसंद है, लेकिन छुट्टियों में। तापमान बिल्कुल गिर कर शून्य को छूने की होड़ में है। लगातार चौथा दिन...बारिश है कि थमने क
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कब पिटारी से निकल दिल्ली गये विषधर,ये सियासत की बहस अब है सँपेरों में...

इस बार की आनेवाली गरमी व्यस्त रखने वाली है इधर हमें...पड़ोस की खलबली...पलायन...माहौल...वादी की हवा-सब इसी की अग्रीम सूचना दे रहे हैं। इस जमी बर्फ से और इसके पिघलने से कुछ दर्दनाक और कई विजयी-उल्लास वाली यादें जुड़ी हुईं हैं...कभी अपनी पुरानी डायरी के य