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इन निरुपमाओं का क्या दोष था?

यह हम सब की सहिष्णुता का इंतिहान है!(यह आलेख हमारी एक पाठक ने गोरखपुर से भेजा है। सैद्धांतिक बहसों में उलझे हम लोगों के बीच यह निजी अनुभव बहुत सारे नये आयाम खोलता है)नवजात कन्या वध तथा कन्या भ्रूण हत्याआज के युग में जहाँ भारतीय नारियाँ घर की चहरदिवारी
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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भाँग, भैया, भाटिन, भाभियाँ, गाजर घास ... तीन जोड़ी लबालब आँखें - 1

.. आठवीं से मित्र संजय के साथ होली में गाँव के लिए निकल पड़ा हूँ। हम दोनों के परिवार लखनऊ में ही रहेंगे - परीक्षाएँ होली के अगले दिन से ही प्रारम्भ जो हो रही हैं। होली में पत्नियों को अकेला छोड़ चल देने का साहस बिरलों में होता है। मानव मन की तरंगें और
 
गिरिजेश राव
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विश्विद्यालय यानि डिग्री डिस्ट्रिब्यूशन सेन्टर

( गोरखपुर विश्विद्यालय से जुड़ी मेरी स्मृतियां सिर्फ़ अर्थशास्त्र विभाग तक महदूद नहीं हैं। मुझे याद है कि कैसे इसके लेक्चर थियेटरों में अपने समय के बेहतरीन विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भाषण और उनसे बहस-मुबाहिसे ने मुझे देश-दुनिया को समझने का नया
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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गोरखपुर के मज़दूर आन्दोलन की रपट

यह रपट/अपील लखनऊ से भाई कामता प्रसाद ने भेजी है। इस संबंध में मुक्त विचारधारा eमें भाई स्वदेश कुमार का आलेख भी छपा है) आनलाईन पेटीशन पर भी आप समर्थन कर सकते हैं गोरखपुर में एक शांतिपूर्ण, न्‍यायसंगत मज़दूर आंदोलन को ''माओवादी आंतकवाद'' का ठप्‍पा लगाक
 
अशोक कुमार पाण्डेय