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गोपाल प्रसाद की एक कविताजब यही अपराध है किचोर को चोर न कहूंतो मैं सहर्ष यह अपराध करूंगाधरूंगा हर उस जगह कदमजहां धरना जरूरी हैआम को आमऔर वाम को वामउस समय तक कहूंगाजब तक मेरी जीभ मेरे पास हैकैसा समय आ गया है किप्रतिवाद बर्फ बन गया हैसुना नहीं आपनेपैसेंजर
 
Satyendra Prasad Srivastava