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किचेन संभालने को शादी…?

मैं जाने कब सुधरुँगी ? सोचती हूँ - भगवान ने जब मुझे बनाया तो पाँच हाथ की ज़बान क्योँ दे दिया…? मिले तो पूछूँ…? क्यों मैं बात-बात पर जवाब दिए बिना नही मानती…? आए दिन किसी न किसी को मेरी बात से परेशानी हो ही जाती है। जबकि मै किसी को परेशान  करना नहीं
 
रचना त्रिपाठी
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मेरी बात ...खालिस गृहिणी वाली

इधर कुछ दिनों से सपने में एक महिला बार बार नजर आ जाती है ...चमचा बेलन हाथ में लिए अपनी लाल लाल आँखों से घूरते उलाहने देती हुई - " बड़ा प्रचार कर रखा है अपना साधारण गृहिणी होने का ... कभी की है गृहिणी वाली कोई बात ... जब देखो ... गीत , ग़ज़ल , संस्मरण
 
वाणी गीत