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निर्धार

आजकाल मी जरा वेगळी वाट चालतोय… अनेक वेळा असे पाहतो की कोणीतरी सज्जन एखाद्या वाकड्या व्यक्तीला सरळ मार्ग दाखविण्याचा प्रयत्न करतो तेव्हा तो लौकिकमूर्ख त्याच्याच अंगावर उसळून धमकावायचा प्रयत्न करतो… असे अनेक वेळा घडू लागले तेव्हा मी ही एक
 
शिरीष
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मै कलमा पढ़कर सुरैया नही बनाना चाहती

यह कविता गुजराती की मशहूर कवियत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सरूप बेन की है। इसे गुजराती से हिन्दी में अनुदित मैंने किया है...बाकी तो बात ही बोले तो बेहतर ) क्या है वज़ह मेरे जीने की नहीं मै क़लमा पढकर सुरैया नहीं बनना चाहती क्योंकि इस देश की तमाम सुरैया,
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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एक शानदार प्रयास, वहीं अफसोस कहाँ है हिन्दी?

भगवद्गोमंडल.कॉम नामक साइट के बारे में पढ़ा और फिर जब उसे देखा तो प्रभावित कर गई. एक शानदार प्रयास. भाषा की सेवा का एक अच्छा अनुकरणीय उदाहरण. पहले, भागवद्गोमण्डल है क्या? भागवद्गोमण्डल के लिए प्रशंसा के हर शब्द कम पड़े वैसा गुजराती ज्ञानकोश है. पहली ब
 
संजय बेंगाणी