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स्वर्णिम गुजरात

गुजरात की पहचान गाँधी-सरदार जैसे महान नेताओं के दायरे में कैद करने की कोशिशों की आलोचना करता हूँ, जब वे ऐसा करते है, तब भूल जाते हैं कि दयानन्द सरस्वती भी गुजरात से थे और श्यामजी कृष्ण वर्मा जैसे क्रांतिकारी भी.
 
संजय बेंगाणी
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वफादार रसोईया…बचाओ…

वफादारी इसे ही कहते है. मालिक की पसन्द ना पसन्द का पूरा ख्याल करे. कार्टून का विचार हमारा है. मुस्कान की गेरेंटी सहित....
 
संजय बेंगाणी
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आपने सुरत के रसावाले खमण खाये हैं कभी?

खाने पीने के मामले में सुरतीलालाओं का मिज़ाज़ बड़ा गज़ब का है, उन्हें ये रात दस बजे ये पता चले की वहां एक चाय का ठेला खुला है और क्या मस्त चाय बनती है तो फटाफट अपनी गाड़ी निकाल कर एक कट चाय पीने चले जयेंगे। कट चाय भले ही तीन की आती हो [...]
 
सागर नाहर
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ऐसे खत्म होगा लाल आतंक

देश के लिए आंतरिक चुनौती बने इस लाल आतंक का क्या कोई इलाज है? हिंसक नक्सलवाद से पार पाने का एक सफल प्रयोग भारत के ही एक कोने में हुआ है. यह कोना जहाँ नक्सलवाद का उदय हुआ वहाँ से ठीक विपरित दिशा में है. यहाँ के लोगों ने युद्ध व हथियार छोड़ कर शांति और
 
संजय बेंगाणी