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टूट पायेंगे नहीं पत्थर ज़रा सी चोट से .........( गीत )

टूट पायेंगे नहीं पत्थर ज़रा सी चोट से ! ये उड़ाने ही पड़ेंगे भूमिगत विस्फोट से !! जो ' विचारों ' का मसीहा था 'बिचारा ' हो गया है ! जिसको होना था भँवर ,वो ही किनारा हो गया है ! हम धरा को कोसते हैं, अंकुरण देती नहीं , क्यों नहीं कहते कि ये बादल नकारा हो
 
ललितमोहन त्रिवेदी