“कहीं सो न जाना!”
चमक और दमक में, कहीं खो न जाना!कलम के मुसाफिर, कहीं सो न जाना! जलाना पड़ेगा तुझे, दीप जगमग, दिखाना पड़ेगा जगत को सही मग, तुझे सभ्यता की, अलख है जगाना!! कलम के मुसाफिर...................!! सिक्कों की खातिर कलम बेचना मत,कलम में छिपी है ज़माने की
Jun 17 2010 11:06 AM



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