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सौतन - सौ तन हो गयी,सत्यम शिवम् संजोग

मन मोहन संग रास - रस , अंग - अंग सकुचाय ! अनुभव मत पूछो सखि , मोसे कहो नै जाय !! देखूं तो प्रिय के नयन , सुनूं तो प्रिय के गीत ! हिय हारी मैं तुम कहो , तभी तो मोरी जीत !! मैं प्रियतम की बावरी , प्रीत रंग चहुँ ओर ! आई मधु ऋतु , देने पीर अछोर !! आज मिल
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'