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गांधी के शब्दों से गांधी को उजाड़ने की खता

“यू मस्ट बी द चेंज यू वांट टू बी "। महात्मा गांधी ने यह शब्द कब कहे पता नहीं लेकिन वर्धा में बापू कुटी जाने के रास्ते में बड़े बड़े अक्षरों में लिखे इन शब्दो ने बरबस शरीर में एक सिहरन जरुर दौड़ा दी कि कहीं बापू के लोग अब खड़े तो नहीं हो रहे। लेकिन कहीं
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सबसे बेहतर मेहतर

पुरी के जगन्नाथ शबर आदिवासियों के पास थे । पुरी के राजा ने उनसे कहा कि वे जगन्नाथ को उन्हें दे दें। साबरों ने इन्कार कर दिया । पुरी की राजा का एक मन्त्री शबर लोगों के राज में जा कर बसा , वहाँ की राज-कन्या से ब्याह रचाया और तब जगन्नाथजी को माँग कर [...]
 
Aflatoon अफ़लातून
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उतावली से आम नहीं पकते, दाल नहीं चुरती

एक और अनेक, यानी व्यक्ति और जगत, या आत्मा और पदार्थ- की भारतीय प्राचीन मनीषियों की व्याख्या वाला जीवन दर्शन गांधी को जिस दृष्टा की ओर बढ़ाता है उसमें निष्काम कर्म की अवधारणा उनके मानस का प्रतिबिम्ब बनकर ही ''स्वराज" के रूप में प्रकट होती है। गांधी के
 
विजय गौड़
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स्वर्णिम गुजरात

गुजरात की पहचान गाँधी-सरदार जैसे महान नेताओं के दायरे में कैद करने की कोशिशों की आलोचना करता हूँ, जब वे ऐसा करते है, तब भूल जाते हैं कि दयानन्द सरस्वती भी गुजरात से थे और श्यामजी कृष्ण वर्मा जैसे क्रांतिकारी भी.
 
संजय बेंगाणी
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राष्ट्रपित्याचे कामजीवन

गांधीचे व्हल्गरायझेशन: म.टा. आणि मिड डे चा हलकटपणा या ८ तारखेच्या पोस्टवर आलेल्या प्रतिक्रियांना उत्तर लिहीत असताना ती लांबली आणि ही नवीन स्वतंत्र पोस्ट तयार झाली. जेड अ‍ॅडम्सने नावाच्या इंग्लिश इतिहासकारानं नुकतच "गांधी, नेकेड एम्बिशन" नावाचं पुस्तक
 
यशवंत कुलकर्णी
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पहले दिल में थे, अब बटुए में हैं

-मोनिका(मोनिका रांची, झारखंड में पब्लिक एजेंडा पत्रिका से जुड़ी हैं।)मोहनदास करमचंद गांधी। हमारे और आपके लिए भले ही यह नाम आज देश का सर्वप्रिय और सबसे सम्मानित संस्था का हो, लेकिन इसके अनुसरण का हर मौका हाथ से जाता रहता है और लोग इसके मूक गवाह बने देखते
 
आर. अनुराधा
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राष्‍ट्र संघ का अहिंसा प्रेम!

वैद्यनाथ प्रसाद सिन्‍हा .. पहली-पहली बार संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के तत्‍वावधान में गांधी जयंती पर 'अहिंसा दिवस' मनाने का उद्देश्‍य पूर्णत: स्‍पष्‍ट नहीं हो सका। राष्‍ट्र संघ के महासचिव वान की मून या भारत की आमंत्रित प्रतिनिधि सोनिया गांधी या किसी अन्‍य
 
सन्‍मय प्रकाश
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तो क्या ठाकरे इस देश के मालिक हैं?

राज ठाकरे, स्मिता ठाकरे , सचिन तेंडुलकर...  उदाहरणों की कमी नहीं। शिवसेना मराठी मुद्दे पर लगातार पिट रही है। सो, ठाकरे ने एक बार फिर 'हिंदू' मतदाताओं पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया। शिवसैनिकों के मंदिर तोड़ने का 'दावा'वह पहले भी कर चुके हैं ज
 
प्रणव प्रियदर्शी
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दृष्टि : अधभूखा राष्ट्र

अधभूखे राष्ट्र के पास न कोई धर्म, न कोई कला और न ही कोई संगठन हो सकता है।
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बरसी पर दावत उड़ाते मनमोहन

मन को मोहे लिए जाते हैं मनमोहन। सौम्य, सीधे, शांत, सज्जन मनमोहन। हमारे प्रधानमंत्री, महान अर्थशास्त्री मनमोहन। वाइट हाउस में दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स, राष्ट्रपति ओबामा के पहले स्टेट गेस्ट बनाए जाते मनमोहन। 26/11 की बरसी पर दावत उड़ाते मनमोहन। मारे
 
शिवेंद्र चौहान
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भगवान, इस देश को एक डिक्टेटर दे दो

उस शाम जब मामा से मिलने गया , तो वह कुछ परेशान से नजर आ रहे थे। पूछने पर पता चला कि आज किसी यूनियन का धरना-प्रदर्शन हो रहा था , उसी के चक्कर में बेचारे पूरे दो घंटे जाम में फंसे रहे।   मुझे हंसी आ गई। मैंने कहा , ' मामा, इसमें परेशान होने की क्य
 
प्रभात गौड़
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जयप्रकाश : जन्मजात योद्धा : महात्मा गांधी

गांधीजी की नजर में जेपी जयप्रकाश जमजात योद्धा है , उसने अपने देश की मुक्ति के लिए सबकुछ का त्याग किया है । परिश्रम और प्रयत्न करने से वह कभी चूकता नहीं । कष्त और यातना सहने की उसकी क्षमता का कोई जवाब नहीं । - महात्मा गांधी यह संघर्ष केवल सीमित उद्देश
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किफायत-शारी के सदके ।(व्यंग्य)

लेखक – नरेश मिश्र गांधी जी सरदार पटेल और महादेव भाई देसाई के साथ यरवदा जेल में बंदी थे । सरदार बापू के मुंहलगे थे । इसलिये उनसे मजाक करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते थे । बात गांधी जी की बकरी पर चल पड़ी । बापू ने गाय का दूध पीना [...]
 
K M Mishra
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गाँधी की अहिंसा का फलितार्थ

अपने देश में गांधी 1915 में लगभग अजनबी की हैसियत से संयोगवश ही लौटे. कानून के पेचीदे पेशे ने उनके अन्त:करण को उद्वेलित किया और वे स्वार्थ की पगडंडियों से भटकते-भटकते लोकसेवा के राजमार्ग पर आ खड़े हुए. उन्होंने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन में मनुष्य की
 
Kanak Tiwari
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‘हिन्द स्वराज’ पढ़ने का अधिकारी कौन?

जो लोग देशभक्ति को एक पुरानी और बासी चीज मानते हों तथा 'ग्लोबल विलेज' या 'विश्व सभ्यता' में आस्था रखते हों अथवा मात्रा 'जय जगत' में जिनकी श्रद्धा हो, उन्हें हिंद स्वराज पर बहस करने में वक्त जाया नहीं करना चाहिए।
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