फूल तुमने जो कभी मुझको दिए थे ख़त में...फ़िरदौस ख़ान
चांदनी रात में कुछ भीगे ख्यालों की तरहमैंने चाहा है तुम्हें दिन के उजालों की तरहसाथ तेरे जो गुज़ारे थे कभी कुछ लम्हेंमेरी यादों में चमकते हैं मशालों की तरहइक तेरा साथ क्या छूटा हयातभर के लिएमैं भटकती रही बेचैन गज़ालों की तरहफूल तुमने जो कभी मुझको दिए थे
Jun 17 2010 12:32 PM



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