रोशन लाल ‘रौशन’ की चंद ग़ज़लें - कोई बुश है कोई ओबामा है… किसने गिरते धुओं को थामा है…
एक अंधी हवस का शिकार आदमी भूल बैठा है आपस का प्यार आदमी खुद से जब तक नहीं आशकार आदमी आदमी में न होगा शुमार आदमी जीतकर भी गया जंग हार आदमी कितना नादान है होशियार आदमी जान किन मौसमों के हवाले हुआ आदमी को नहीं साजगार आदमी अपने साये के पीछे चला जा रहा एक
Jun 12 2010 09:51 AM



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