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सरकार के पास गरीबी हटाने के लिए पैसा नही है!

ग़रीब कौन है? सरकारी आंकड़ों के हिसाब से अब तक तो वह ग़रीब था जो कैसे भी ज़िन्दा रहने भर का राशन जुगाड़ लेता था। आलोचनायें हुईं तो फिर से विचार किया गया और अब तेंदुलकर समिति कहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों 444रुपये 68 पैसे और शहरी क्षेत्रों में 578 रुपये और ८०
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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गरीबी नहीं, अमीरी की रेखा हो – सुनील -

भारत सरकार के प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा विधेयक ने देश में एक बहस छेड़ दी है। सरकार ने इस खाद्य सुरक्षा का मतलब सस्ती दरों पर खाद्यान्नों की सार्वजनिक वितरण प्रणाली से माना है और इसे वह गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों तक सीमित करना चाहती है। राज्य सरकारो
 
अफ़लातून