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हिंदी पत्रकारिता दिवस - ३० मई - पर संगोष्ठी

इधर कुछ समय से हैदराबाद के वरिष्ठ हिंदी पत्रकार डॉ. हरिश्चंद्र विद्यार्थी जी अपने हर आयोजन में यह कहने लगे हैं, ''बस, यह मेरा अंतिम संयोजन है''. लेकिन हम लोग उनकी आयोजनजीविता या संयोजनधर्मिता को पहचानने के नाते जानते हैं कि हर तिमाही कम से कम एक संगोष्ठी
 
ऋषभ Rishabha
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कवि अगर रसोइया भी हो!

इधर कुछ दिन से व्यस्तता के साथ कुछ तनाव सा था. वैसे भी अप्रैल-मई में संस्थान के कार्याधिक्य के कारण तनिक ज्यादा दबाव तो सिर पर रहता ही है. लेकिन गत दिनों एक संगोष्ठी के अवसर पर जबसे दोस्तों ने आँख में अंगुली दे-देकर दिखाया कि डॉ. गोपाल शर्मा के लीबिया
 
ऋषभ Rishabha
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उत्तरआधुनिकता पर पोस्टर प्रदर्शनी

उच्च शिक्षा और शोध संस्थान में उत्तरआधुनिकता पर केंद्रित पोस्टर प्रदर्शनी हैदराबाद, 25 अप्रैल।उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के खैरताबाद स्थित परिसर में एक विशिष्ट विषय केंद्रित ‘‘शोधप्रबंध एवं पोस्टर प्रदर्शनी’’ का आयोजन किया
 
ऋषभ Rishabha
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‘‘उत्तरआधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’ पर संगोष्ठी संपन्न

‘‘उत्तरआधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’ पर संगोष्ठी संपन्नहैदराबाद - 16 अप्रैल, 2010। दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के विश्वविद्यालय विभाग में नवगठित साहित्य संस्कृति मंच और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद के तत्वावधान में ‘उत्तरआधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’
 
ऋषभ Rishabha
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‘‘उत्तर आधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य’’

भूमंडलीकरण, उदारवाद और बाजारवाद के विष्वव्यापी प्रसार के साथ चिंतन और सृजन के क्षेत्र में तीव्रता से बदलाव आए हैं। संस्कृति, समाज, कला और राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में लंबे समय तक दो धु्रवीय विचारधाराओं का प्रभाव रहा। बदले हुए संदर्भ में यह बात सामने आई
 
ऋषभ Rishabha
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स्त्री और उपभोक्ता संस्कृति - चर्चा

पिछली प्रविष्टि के क्रम में......Dr sahab, I know why you are writing ! I want to share with you an advise of a German writer to a new writer. Its totally new for me. The advisor says, " If you think you are capable of living without writing, do not
 
ऋषभ Rishabha
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सांस्कृतिक कार्यक्रम : दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा

उच्च शिक्षा और शोध संस्थान में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वार्षिकोत्सव संपन्नहैदराबाद, 29 मार्च।दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद केंद्र के तत्वावधान में एकदिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ जिसके
 
ऋषभ Rishabha
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इफ्लू : ''स्त्री और उपभोक्ता संस्कृति''

अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय , हैदराबाद, में नए-नए खुले ''हिन्दी एवं भारत अध्ययन विभाग'' में २४-२५ मार्च २०१० को भाषा, साहित्य और संस्कृति के समकालीन परिदृश्य पर विचार-विमर्श के लिए द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई. देश भर के दिग्गज
 
ऋषभ Rishabha
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कविता वाचक्नवी सम्मानित

'स्वतंत्र वार्त्ता'-६/३/२०१०-पृष्ठ ३
 
ऋषभ Rishabha
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प्रेमचंद की कहानियों का मंचन

साठये महाविद्यालय [मुंबई] में आयोजित संगोष्ठी की पहली साँझ बड़ी मनोरंजक रही. प्रेमचंद की तीन कहानियों का मंचन देखने को मिला - 'सवा सेर गेहूँ', 'संपादक मोटेराम शास्त्री' और 'ईश्वरीय न्याय'.यह जानकारी रोमांचकारी थी कि प्रेमचंद की कहानियों के दीवाने शौकिया
 
ऋषभ Rishabha
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सूफी काव्य का पुनर्मूल्यांकन

फरवरी के अंतिम सप्ताह में मुम्बई जाना हुआ. साठये महाविद्यालय में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी थी ५ और ६ तारीख को.संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह मध्यकालीन कविता के प्रति समर्पित विद्वान् हैं. संत काव्य और कृष्ण काव्य के बाद इस वर्ष उन्होंने सूफी काव्य पर
 
ऋषभ Rishabha
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चेन्नई में होली कविगोष्ठी

अभी दसेक दिन के लिए चेन्नई जाना हुआ. कार्यशाला के समापन के अवसर पर तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी ने होली की पूर्व वेला में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के अय्यंगार हाल में कवि गोष्ठी रख ली.कई नए पुराने रचनाकार मित्रों से मुलाकात हुई. आरंभ में प्रो.दिलीप
 
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डॉ कविता वाचक्नवी को ''अक्षरम सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान - २०१०'' प्रदत्त

''भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद्'' के सहयोग से ''अक्षरम'' द्वारा दिल्ली में आयोजित द्विदिवसीय आठवें अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव के अवसर पर डॉ कविता वाचक्नवी को वर्ष २०१० का '' अक्षरम सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान '' प्रदान किया गया. इस अवसर पर आयोजित विविध
 
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ऋषिकोंडा : मैं तो घोड़ी चढूँगा

शहर तो अच्छा ही है विशाखापट्टनम .अपने हैदराबाद से छोटा है ,तो शांत भी है.लोग भी भले हैं - अपनेपन से आतिथ्य निभाने वाले [अपवादस्वरूप 'शिविर' संयोजक स्थानीय संस्था की सर्वोच्च पदाधिकारी को छोड़कर]. मेरे तो कई सारे साहित्यिक मित्र और शिष्य भी हैं वहाँ.
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विशाखपट्टनम में नवलेखक शिविर संपन्न

केंद्रीय हिंदी निदेशालय और विशाखापत्तनम की संस्था हिंदी साहित्य किरण के संयुक्त तत्वावधान में २२ अक्टूबर से २९ अक्टूबर [२००९] तक आठ दिवसीय हिंदी नवलेखक शिविर का आयोजन किया गया. डॉ. यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद द्वारा उद्घाटित इस शिविर में आंध्र प्रदेश क
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शहीद हूँ मैं [कविता पोस्टर] - विजय कुमार सपत्ति/ सुमेधा

आतंकवाद का मुकाबला कैसे हो? बशीर साहब की पंक्तियाँ याद आती हैं:- लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में। कैसा नपुंसक है यह देश, बर्फ हो जाता है। लगातार निर्दोष मारे जा रहे हैं। लगातार एक छद्म युद्ध शांति के कबूतर का गल
 
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कहानीकार के साथ एक दिन [कथाकार तेजेन्द्र शर्मा के साथ मुलाकात ; एक रिपोर्ट] - राजीव रंजन प्रसाद

सागर कितना गहरा होता है? अथाह शब्द का अर्थ हमें तब ज्ञात हुआ जब एक पूरा दिन कथाकार तेजेन्द्र शर्मा के साथ गुजारने के बाद भी, दिन बौना हो गया। तेजेन्द्र शर्मा की कहनियों, उनके कथानकों, घटनाओं और पात्रों से तो अनेको मुलाकातें हुई हैं लेकिन जब स्वयं तेज
 
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