पहले तो आप सभी को ६०वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। क्या आपने नया "मिले सुर मेरा तुम्हारा" देखा ? पहले मैंने सोचा था की अपने ब्लॉग पर विडियो डालूंगी लेकिन मन नहीं किया। मुझे पता नहीं क्यों इस नए विडियो में कुछ भी ख़ास नहीं लगा बस संगीत का अंदाज़
मुन्ना भाई...मुन्नाभाई आज आप इधर कू ? अरे सर्किट आज क्या है ना अपुन के बिल्डिग में झंडा दिवस मानाएला है. सुबह-सुबह मैंने अपना खिड़की से झाक कर देखा . मेरा हाउसिग सोसायटी का मैदान में कुछ लोग डंडा के ऊपर झंडा बांधने को तैयारी कर रहा था . मै मन में बोला,
आज़ाद भारत के ६१ वे गणतंत्र के दिन मुझे इकबाल की कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं जो हिंदुस्तान के इतिहास मेंस्वरानाक्षरों में कही जाती हैं। सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्तां हमाराहम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिसतां हमारा गुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन
ये तुलसी, ये मीरा . ये रसखान की मिटटी है.ये गांधी, ये बिस्मिला के बलिदान कि मिटटी है..यही गूंजती है सदाए, अमन चैन की .यह मेरे प्यारे हिन्दुस्थान की मिटटी है...मै ही गंगा, मै ही जमना, मै ही चम्बल का पानी हू.मै ही दुर्गा, मै ही रजिया, मै ही झांसी की
वे सभी गरीब ग्रामीण थे। उनकी आंखों में मोतियाबिंद ने अंधेरा भर दिया था। आपरेशन का खर्च नहीं उठा सकते थे, इसलिए निशुल्क आपरेशन शिविर की खबर पाकर बलांगीर (ओडिशा का एक जिला) जा रहे थे। रास्ते में एक गैस टैंकर ने उनकी टाटा मैजिक को सामने से टक्कर मार दी।
गणतंत्र दिवस आ रहा है। पूरे देश में इसे मनाने की कोशिश शुरू हो जाएगी। गणतंत्र दिवस को हमारी सरकार और उसके अनुयायी राष्ट्रीय उत्सव कहते हैं। देश के सारे विद्यालयों और सरकारी संस्थानों में इस राष्ट्रीय उत्सव को मनाने की बाध्यता है। सवाल यह है कि उत्सव क्या
गणतंत्र दिवस परेड 2010 के लिए महाविद्यालयीन छात्र मुकेश बाघ चयनित
मेरे मित्र मुकेश नई दिल्ली 26 जनवरी परेड में भाग लेंगे। खबर सुनकर और मीडिया में पढ़कर खूब मजा आया। कल अखबारों में निश्चित तौर मुकेश बाघ की फोटो छप रही है। मुकेश पढ़ाई के साथ-साथ