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घुघुती घुरोण लगी म्यार मैंता की

नरेन्द्र सिंह नेगी जी का एक बेहतरीन बिरह गीत जो घुघूती पक्षी को माध्यम बना कर लिखा गया है। यह यह गढ़वाली गीत सदाबहार और बहुत ही मधुर है ।घुघुती घुरोण लगी म्यार मैंता कीबौडी बौडी ए गी ऋतू , ऋतू चैत कीऋतू , ऋतू चैत की, ऋतू, ऋतू चैत की........डंडीयों खी
 
गजेन्द्र बिष्ट
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ख़ुद तेरी लागली

कुछ ख़ास नहीं... डेढ़ महीने की इस ब्लॉग से छुट्टी के बाद आज अचानक ही मैदान में उतर आया। दरअसल काम की व्यस्तता और कमर का दर्द एक ही रफ़्तार से बढ़ते रहे और ठीक से कुछ भी नहीं हो पा रहा था। अब भी कोई अन्तर नहीं पड़ा है मगर लगा दोस्त कहीं नाराज़ न हो जाएँ