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‘मेरे लेखों को उकेरा नहीं जाता’/13 गजलें /डॉ. रामकुमार सिंह

इन गजलों के बारे में – बहुत दिनों से …..या कहिये वर्षों से जो ‘ओढ़ता-बिछाता’ रहा …..उनमें से कुछ छपीं …..कुछ डायरियों के पन्नों पर बिखरी रहीं। …दुष्यंत से हमेशा प्रभावित रहा हूँ….इन गजलों में भी वह प्रभाव आ
 
डॉ. रामकुमार सिंह