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जायें तो जायें कहाँ ?

हो गया बदरंग आलम , है क़यामत सा समां हर तरफ़ बिखरी है आतिश , जायें तो जायें कहाँ धोते हैं अश्कों से अपने यारो ! हम ज़ख्मे - जिगर क्या ख़बर अहले - ज़ुबां को हो गये हम बे - ज़ुबां बे दरद - औ - बेमुरव्वत , बे वफ़ा - औ - बे रहम बेहया - औ - बेशरम सब हो गये अह
 
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