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गगनांचल के अंदर क्‍या है : एक आंचल में इतना गगन समाया कैसे : जानना चाहते हैं

आइये जानते हैंगगनांचल क्‍या हैभीतर क्‍या हैबाहर तो दिखला दिया हैआवरण मनीष वर्मा का रचा हैप्रवासी साहित्‍य के पक्ष-विपक्ष पर पेश है प्रस्‍तुतिलालित्‍य ललित की, आंक रहे हैंकितना है प्रवासी और कितना है साहित्‍यविचार हैं सम्मिलित इसमेंराजेंद्र यादव केवे कहते
 
अविनाश वाचस्पति
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गगन को आंचल में लेने का श्री प्रेम जनमेजय का प्रयास (अविनाश वाचस्‍पति)

प्रिय / सम्माननीय माननीय श्री प्रेम जनमेजय जी के संपादकत्व में, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् की प्रतिष्ठित पत्रिका, ‘गगनांचल’ का पहला अंक, वर्षः33 अंक2, प्रकाशनार्थ प्रेस में चला गया है। जैसा कि संपादकीय में भी आपने लिखा है - इस अंक में आपको कुछ नए
 
अविनाश वाचस्पति