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निशब्द सदा..ओ गंगा तुम, बहती हो क्यूँ

जब मैं पहली बार ये गीत सुना था तो मैं तो बिलकुल स्‍तब्‍ध रह गया था.मुझे याद तो नहीं पहली बार ये गीत कब सुना था लेकिन हाँ, उस दिन से लेकर आज तक ये गीत मैं अक्सर सुनते आ रहा हूँ.एक नयी ताकत जैसे आ जाती हो इस गीत को सुनने के बाद.भूपेन हज़ारिका की आवाज़ में