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एक नयी खेल नीति : अशोक सेक्सरिया

हमारे-जैसे गरीब देश में खेलों का स्वरूप यह होना चाहिए कि उनमें प्रतियोगिता का तत्त्व कम-से-कम रहें, संगीत और नृत्य के तत्त्व अधिक रहें , कम-से-कम उपकरण हों और ऐसी सहजता हो कि अधिकाधिक लोग खेलने की ओर प्रवृत्त हों । इस बारे में गंभीरता से सोचना आवश्यक है
 
अफ़लातून
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एक नयी खेल नीति : अशोक सेक्सरिया

हमारे-जैसे गरीब देश में खेलों का स्वरूप यह होना चाहिए कि उनमें प्रतियोगिता का तत्त्व कम-से-कम रहें, संगीत और नृत्य के तत्त्व अधिक रहें , कम-से-कम उपकरण हों और ऐसी सहजता हो कि अधिकाधिक लोग खेलने की ओर प्रवृत्त हों । इस बारे में गंभीरता से सोचना आवश्यक है
 
अफ़लातून
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सरकार और खेल : अशोक सेक्सरिया

१९८२ के एशियाई खेल , १९५२ में साढ़े छ: लाख रु. की लागत से आयोजित प्रथम एशियाई खेलों की ही परिणति हैं । प्रथम एशियाई खेलों द्वारा अंगरेजों के राज में खेलों का जो ढाँचा बना था उसे ज्यों-का-त्यों स्वीकार कर लिया गया । खेलों के बारे में आजाद देश में कोई नीति
 
अफ़लातून