कभी कभी हमारे और आपके साथ एक वाक्य घटता है कि जब है कहते है कि चेहरा तो याद आ रहा है किन्तु नाम भूल रहा है किन्तु दैनिक जागरण वालों के साथ इसके उलट हुआ। वे नाम तो जानते थे किन्तु चेहरा भूल गये। जया तो रह गई किन्तु पर्दा गिरा कर बच्चन की तस्वीर
कुछ देर पूर्व समीर जी अर्थात उड़नतश्तरी जी की उक्त टिप्पणी प्राप्त हुई। Udan Tashtari said... भा ज पा और केन्द्रिय सत्ता सीन- जब इतनी बढ़िया कल्पनाशीलता है तो गज़ल क्यूँ नहीं लिखते. कितना दूर तक सोच लेते हो. :) तो प्रस्तुत है हमारी ओर से समीर जी क