इत्र की ख़ुशबू जैसा ये कैसा फ़्लू फैल गया, दूसरों का देख हमने भी चेहरे पे मास्क चढ़ालिया। हमारे इस अंदाज़ पर अन्य लोगों ने कुछ ना बोला मगर गली मे आराम फ़रमा रहे कुत्तों को हमारा ये अंदाज़ पसंद ना आया। झटसे खडे होकर हमारे मूंह पे भोंकना शुरू करदिया। ज्लदी
पता नहीं किसका चेहरा देखकर नींद से जागे थे! सुबह बाहर निकलते फ़क़ीर से ही पाला पड़ना था? बासी मूंह लिए मूंह पर ही शिकायत ठोंका - बड़े नसीबों वाले हैं आप कि यूं बैठे बिठाए ख़ुदा बन बैठे और हमें देखो जनमसे भिखारी। पता नहीं कौनसी जड़ीबोटीयां खालिए थे कि
स्नान के बाद पाकवसाफ़ कपड़े पहन जूंही अपनी जन्नत से बाहर निकले….. हमारे फ़्रिश्ते भी अजीब हैं, अब इनकी जगह इंसानों को काम पे लगाना होगा। रात भर बारिश, घुटनों तक पानी। सुबह उठे तो फिर भी हलकी बारिश जारी। तैयार होकर बाहर निकले ही थे अपनी ही जन्नत
क्लासरूम की ज़ीनत बढ़ाने केलिए ख़ुदा ने प्रधान अध्यापक श्रीमती ज़ीनत को बुलाया और शिकायत करदी - बड़े अजीब किसम के बच्चे हैं, हम पढ़ा रहे हैं और यहां देखें सब मूंह खोले सो रहे हैं।
श्रीमती ज़ीनत ने ख़ुदा से कहा - आप बच्चों को कुछ ऐसा पढ़ाएं कि वे जाग उठे
किसी ने पूछा - भारत और पाकिस्तान की जंग मे जीत किसकी होगी? ख़ुदा ने बताया - मियां, ये तो तैय है नुक़सान आम जनता का ही होगा फ़र्क़ सिर्फ इतना कि पाकिस्तान को जिस काम केलिए तीस मिनट दर्कार हों वहीं भारत सिर्फ दो मिनट मे काम तमाम करदे। लेकिन ताजुब की बा