पसंद करें
0
नापसंद करें

इन्सानियत

इन्सानियत इंसान की पहचान है , रावण सा रहना तो आसान है।सारे किनारे खुदगरज़ हैं इसलिये , दिल मे समन्दर के लिये सम्मान है।दिल से चरागों की इबादत करता हूं , अब आंधियों से जंग का ऐलान है।गाने अदावत के नहीं गाता मैं , मुझको मिलन के गीतो का वरदान है।मैं बन गया
 
ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι
टैग: खुदा