इन्सानियत
इन्सानियत इंसान की पहचान है , रावण सा रहना तो आसान है।सारे किनारे खुदगरज़ हैं इसलिये , दिल मे समन्दर के लिये सम्मान है।दिल से चरागों की इबादत करता हूं , अब आंधियों से जंग का ऐलान है।गाने अदावत के नहीं गाता मैं , मुझको मिलन के गीतो का वरदान है।मैं बन गया
May 30 2010 05:42 AM



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