आईनों से दुश्मनी
आईनों से नहीं है दुशमनी मेरी । ,अक्श से अपनी डरती ज़िन्दगी मेरी।हुस्न ही है मुसीबत का सबब मेरा ,क्यूं इबादत करे फ़िर बे-खुदी मेरी ।साहिलों की अदा मंझधार के दम से, लहरों को पेश हरदम बन्दगी मेरी ।घर वतन छोड़ आया हुस्न के पीछे , आज खुद पे हंसे सरकशी मेरी
Jun 12 2010 07:09 AM



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