पसंद करें
2
नापसंद करें

खुद को मिटाती चली गई

खुद को मिटाती चली गई तेरे प्यार में मैं खुद को मिटाती चली गई। दस्तूर-ए-दुनिया के निभाती चली गई॥ चारो तरफ रिवाज़ों की भीड़ है खड़ी, रस्में-वफ़ा मैं फिर भी निभाती चली गई। तेरे प्यार में मैं खुद को मिटाती चली गई॥ चाहत में तेरी खुद को मिटा डाला है मैंने,