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ये सूरत बदलनी चाहिये

दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि आजादी के 6 दषक बाद भी भारतीय लोकतंत्र में समानान्तर न्यायिक प्रक्रिया ‘खाप पंचायत’ के तहत चल रही है जिसके पिछे एक पूरा इतिहास है। ‘खाप पंचायत’ एक पुरानी सामाजिक प्रषासनिक व्यवस्था है जिसका वर्णन ऋग्वेद में मिलता है, जहां पर जाति
 
skmeel
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परिवार, गोत्र, जात, समाज, पंथ, देश और दुनिया

♦ पंकज झा दो रात के बाद मात्र एक दिन का होना या दो दिन के बाद मात्र एक रात को होते रहना, यह दोनों प्रकृतिContinue Reading »