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आम आदमी, आम आदमी और केवल आम आदमी!!

आम जनता के द्वारा निर्वाचित और देश की आम सी दिखने वाली रेल मंत्री ने साल 2010 का रेल बजट पेश कर दिया. जैसे हर नेता या कहें तो जनसेवक चुनाव के वक्त आम जनता के नाम की माला जपता है. वैसे ही रेल मंत्री और वित्त मंत्री बजट पेश करते वक्त आम जनता के नाम का माला
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हनुमान हो लिए राम विरोधी

राजनीति खेल का एक ऐसा मैदान है जहां हर कोई हमेशा अपना-अपना दाव चलता रहता है. यहां कुछ भी पहले से तय नहीं होता. इस मैदान का कोई  भी  रेफरी या अंपायर दावे से कुछ भी नहीं कह सकता. इधर हमेशा कोई न कोई खेल चलता रहता है. मजे की बात तो यह है कि
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कल एक और गणतंत्र दिवस

हर बार की तरह कल एक और गणतंत्र दिवस का समारोह होगा और आज शाम गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश की आम जनता के नाम राष्ट्रपति का संदेश राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित किया जाएगा. इस अवसर पर सब कुछ राष्ट्रिय होगा, सरकारी होगा.क्या मकसद है इस दिन को मनाने का?
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दिल्ली का ये कैसा गांव है?

“मुनिरका गांव” साउथ दिल्ली के बीचों-बीच का एक ऐसा इलाका जो अब केवल नाम के लिए ही गांव है. यहां कुछ भी गांव जैसा नहीं है.  न लोग और न जगह.फिर भी इसे गांव ही कहा और लिखा जाता है. सवाला उठता है कि अगर इस इलाके में गांव जैसा कुछ भी नहीं है तो इसे गांव
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