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मैं तेरा, तेरी दुनिया का

अंगडाई लेते मेरे मैले ख्वाबों को तूने छू लिया था हौले से...जैसे पहले चुंबन सा स्पर्श था वो...और मैं जी लिया था ज़िंदगी मेरी...ख्वाबों में हकीकत की दुनिया...वो मोतियों की दुनिया थी...आंखों से झरती थी...और गर्म पानी का फव्वारा बुझाता था उस शहर की प्यासमैं
 
देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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वादे हैं वादों का क्या...

नेता वायदे बहुत करते हैं... सबके सामने... सीना तानकर... कभी टीवी पर लाइव... तो कभी जनता के बीच... नेता कभी रोड का तो कभी रोटी का वायदा करते दिखते हैं... चुनावों में नेता मुद्दों पर बहस करते हैं... और अगर मुद्दों की कमी पड़ जाए तो एक दूसरे के वायदे ही बन
 
देवेश वशिष्ठ ' खबरी '
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