पसंद करें
4
नापसंद करें

क्षमा

एक दिन बुद्ध ने भूमि पर घिसटते हुए एक लंगड़े योगी को देखा. “मैं अपने पापों का फल भोग रहा हूँ” – योगी ने कहा. “तुमने कितने पापों का फल भोग लिया है?” “यह तो मैं नहीं जानता”. “और कितने पापों का फल भोगना शेष
पसंद करें
2
नापसंद करें

क्षमादान का मूल्य

क्षमादान की शक्ति और उसके महत्व का मोल वही आंक सकते हैं जिन्हें क्षमादान मिला होता है. कुछ तीर्थयात्रियों का दल मंदिर में दर्शन कर रहा था. उनमें से एक श्रद्धालु को ईश्वर की उपस्तिथि का अनुभव होने लगा. वह समाधि में चला गया और उसने ईश्वर से कहा –
पसंद करें
0
नापसंद करें

"क्षमा"

इतना गुमसुम हो गया था जैसे के बेहोश हूँ,खामोशियाँ भी पूछती थीं, इतना क्यों खामोश हूँ,कर रहा था साफ़ बस, मन की सारी मैल को,मशगूल भूलने में था, हर इक पुराने बैर को नाग ढेरों बरसों से, दिल में थे पाले हुए,रंज के बेताल कितने, ख़ुद पे थे डाले हुए,भूत ये करते थे
 
Yogesh Sharma
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

अपने हिस्से की माफ़ी

मुझे पक्का याद था कि आज महिला दिवस है.इसे ही ध्यान में रखकर मैंने कल एक कविता की पोस्ट भी लगाई.पर जब आज स्कूल गया तो किसी ने मुझे शुभकामना नहीं दी.मैंने भी किसी से कुछ नहीं कहा.सब कुछ ऐसे रहा जैसे कोई सचमुच का ऐसा दिन भी हो सकता है जिसमें हँसी का साथ
 
शशिभूषण
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

भुलाए ना भूले इक छोटी सी भूल

तीन दिन पहेले, याने कि १५ जनुअरी, को हर रोज कि तरह चिट्टाजगत कि सैर पर निकली और आदतानुसार अलबेला खत्री जी के ब्लॉग पर दस्तक दी; उस दिन उनके अलोक स्तम्भ का विचार: भूल जाना अच्छा है .... पढ़ा और अपनी टिपण्णी भी कर दी. पर दिन भर मेरे जहन मे कई वाकिये
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे ६) है ये कैसा सफर ?

मजबूर जो किया अए ज़माने तूने, इरादा नही था, इस बयानी का, एक दास्ताँ छुपाते,छुपाते, बयाँ हो रही है... हाँ..यही सत्य है... माँ..तमन्ना की माँ..मासूमा..उनके बारेमे कहना चाह रही हूँ....क्योंकि उनके बचपन का, पूजा-तमन्ना के जीवन पे गहरा असर पड़ा... मासूमा,अ
 
kshama
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे ३ ) वो दिन भी क्या दिन थे !

धीरे, धीरे चलती बैलगाडी, तकरीबन एक घंटा लगाके घर पहुँची...दादी उतरी...बहू की गोद से बच्ची को बाहों में भर लिया...दादा भी लपक के ताँगे से उतरे...दोनों ताँगों को हिदायत थी कि,एक आगे चलेगा,एक बैलगाडी के पीछे...आगे नही दौड़ना..! तांगे वालों को उनकी भेंट
 
kshama
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

बिखरे सितारे ! ५) और दिन गुज़रते रहे...

जो जीवन अनगिनत घटनाओं से भरा हुआ हो...उन लम्हों को कैसे चुनूँ?? एक माला पिरोना चाहती हूँ, उनमे कौन से मोती शामिल करूँ..कौनसे छोड़ दूँ...? तूफानों की शुरुआत तो शायद उस नन्हीं जान के इस दुनिया में आने के पहलेही हो चुकी थी..अब तक तो वह अपनी माँ की बाहोँ
 
kshama
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

न वो आये,न उनका जवाब आया,समझाने को मुझे सारा जंहा आया

बहुत कुछ नही कहूंगा मगर एक बात हैरान कर देने वाली रही।ज़रा ज़रा सी बात पर दौड़ कर टिपण्णी करने वाले विद्वानों ने मेरे सवालो का जवाब देना ज़रूरी नही समझा।मै इसे उनकी कायरता नही समझदारी ही कहूंगा और जब वे समझदार हो गये है तो मुझे भी समझदार होना पड़ेगा।शायद
टैग: क्षमा
पसंद करें
0
नापसंद करें

वो बोलता था सच

अब तक बुद्ध के बारे मे जो कुछ भी जाना है, यों समझिये राइ से ज्यादा कुछ भी नहीं पर जितना जाना है,उससे अनुमान तो लगाया ही जा सकता है की वह क्या ब्यक्तित्व होगा जिसने एक समय के बहाव को पूरी तरह से उलट के रख दिया हो; क्या जादू होगा उसकी वाणी मे जिसने उस समय,
टैग: क्षमा