क्षणिकाएँ-२
१- मौसम के रंग ,
निश्चित समय पर
बदलते हैं,
पर रिश्तों के रंग तो
पल-पल बदलते हैं।
२- रेखाएँ खींचना मगर,
हथेली की लकीरों की तरह,
कम से कम मिल सकें ,
कहीं पर तो हम।
३- धरती की परिधि पर,
सूर्य की तरह
चक्कर मत काटना,
मिलन के लिए,
परिधियों का टूटना,
ज़रूरी
Dec 10 2009 11:35 PM



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