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क्षणिकाएँ-२

१- मौसम के रंग , निश्चित समय पर बदलते हैं, पर रिश्तों के रंग तो पल-पल बदलते हैं। २- रेखाएँ खींचना मगर, हथेली की लकीरों की तरह, कम से कम मिल सकें , कहीं पर तो हम। ३- धरती की परिधि पर, सूर्य की तरह चक्कर मत काटना, मिलन के लिए, परिधियों का टूटना, ज़रूरी