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मार्क्स की प्रसिद्ध रचनाओं से परिचय

यहाँ मार्क्स पूंजीवाद में मजदूर की चार तरह के श्रम के अलगाव से पैदा हुई पीड़ा का जिक्र करते हैं. सबसे पहले उत्पाद से पैदा हुई पीड़ा, जिसे उसी वक्त इसके उत्पादक (मजदूर) से छीन लिया जाता है जब यह उत्पादित हो जाता है. दूसरे, उत्पादन क्रिया (काम) से, जिसे सजा
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बलिहारी माओवाद की

         सच मानिए मैं माओवादियों की हिंसा को लेकर जितना नाराज था आज वैसे नाराज नहीं हूँ। माओवाद के लिए अनेक लोग तरह-तरह की बातें करते हैं, निंदा करते हैं ,लेकिन आज मैं माओवादियों पर खुश हूँ और उनके पौरूष पर बलिहारी हूँ
 
jagadishwar chaturvedi
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कार्ल मार्क्स का जन्मदिन ( 5मई 1818-14मार्च 1883)- अटकलबाजी से मुक्त करो

      कार्ल मार्क्स का आज जन्मदिन है। यह ऐसे मनीषी का जन्मदिन है जो आज भी दुनिया के वंचितों का कण्ठहार बना हुआ है। आज भी मार्क्स की लिखी ‘पूंजी‘ दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब है। आज भी पूंजीवाद और शोषण का कोई भी विमर्श
 
jagadishwar chaturvedi
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कार्ल मार्क्स

" धार्मिक पीड़ा, एक ही समय में, वास्तविक पीड़ा की ही अभिव्यक्ति है और वास्तविक पीड़ा के खिलाफ प्रतिरोध है. दबे-कुचले जीव की सिसकारी है धर्म, निर्दयी दुनिया का हृदय, और आत्माविहीन परिस्थितियों की आत्मा. यह लोगों के लिए अफीम है."
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भगत सिंह की याद में

उनकी शहादत के 75 वर्ष पूरे होने पर ब्रिटिश सरकार ने 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को फाँसी दी तो वे केवल तेईस साल के थे। लेकिन आज तक वे हिन्दुस्‍तान के नौजवानों के आदर्श बने हुए हैं। इस छोटी सी उम्र में उन्होंने जितना काम किया और जितनी बहादुरी दिखायी, उसे
 
संदीप पाण्डेय
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अंतरराष्ट्रीय नारी दिवस पर विशेष

स्वतन्त्रता का अर्थ असामाजिक स्वच्छंदता और पुरुष के शोषण से मुक्ति का अर्थ "यौन मुक्ति" नहीं होता, यह कम्युनिस्ट नैतिकता और विज्ञान के विरुद्ध है -- इसे लेनिन ने एकाधिक बार स्पष्ट किया. : विश्व ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में नारी मुक्ति का प्रश्न और समकालीन
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अमेरिका में क्रांति नजदीक है : रेमंड लोट्टा – अर्थशास्त्री

Posted in क्रांति, पूंजीवादी संकट, समाजवाद, साम्राज्यवाद Tagged: assimilating the legacy of the proletariate, मजदूर वर्ग की विरासत, माओ त्से तुंग, crisis of capitalism
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आग्नेय अक्टूबर

अक्टूबर की रात को, लेनिन स्मोल्नी आ पहुँचे और उन्होंने खुद विद्रोह के संचालन का भार सँभाला। उस रातभर फौज के क्रान्तिकारी दस्ते और रेड गार्डों के जत्थे बराबर स्मोल्नी आते रहे। बोल्शेविकों ने शीतप्रासाद घेरने के लिए, जहाँ अस्थायी सरकार ने अपना अड्डा बन
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होन्डुरस की घटनाओं ने खोली बुर्जुआ लोकतंत्र की पोल

स्पष्ट है कि यह प्रतिरोध मेहनतकश वर्ग चरित्र धारण किये हुए है. देश के उपरी तबके की बहुसंख्या तख्तापलट के पक्ष में हैं लेकिन वे कुल जनसँख्या के मुकाबले में अल्पसंख्यक हैं. निचले तबके के लोग बहुसंख्या में हैं. उनकी तादाद ६५ प्रतिशत है. वे गरीबी में जी
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अक्टूबर क्रान्ति की मशाल बुझी नहीं है! बुझ नहीं सकती!

हमें इस बात को अच्छी तरह से समझना होगा कि अतीत में भी क्रान्तियों के शुरुआती संस्करण असफल होते रहे हैं। सात-आठ सौ वर्षों तक कई दास विद्रोह कुचल दिये गये, तब कहीं जाकर दास प्रथा के युग का पूरी दुनिया से ख़ात्मा हो सका था। सामन्तवर्ग से संघर्ष करते हुए
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आज शहीदे-आजम का 102वां जन्मदिन है

अमर शहीदों का पैगाम, जारी रखना है संग्राम ! भगत सिंह की बात सुनों, नई क्रांति की राह चलो ! मेहनतकश बहनों और भाईयो, 28 सितंबर को महान शहीदे-आजम का 102वाँ जन्मदिन है. शहीदे-आजम के जन्मदिन पर जरूरत है कि हम महज रस्मी श्रद्धान्जलियों से हटकर अपने महबूब श
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सर्वहारा आन्दोलन के अंतरराष्ट्रीय चरित्र का विकास और क्रांति

कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “वर्ग विरोध पर आधारित समाज में शोषित वर्ग अनिवार्यत: विद्यमान रहता है. इसलिए शोषित वर्ग की मुक्ति से नए समाज का निर्माण होता है. शोषित वर्ग की मुक्ति के लिए आवश्यक है कि विद्य
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पाँच क्रान्तिकारी जनसंगठनों का साझा चुनावी भण्डाफोड़ अभियान

चुनावी राजनीति के मायाजाल से बाहर आओ! नये मज़दूर इन्कलाब की अलख जगाओ!! देशभर में लोकसभा चुनाव के लिए जारी धमाचौकड़ी के बीच बिगुल मज़दूर दस्ता, देहाती मज़दूर यूनियन, दिशा छात्र संगठन, नौजवान भारत सभा, और स्‍त्री मुक्ति लीग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब
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चुनावी नौटंकी का पटाक्षेप: अब सत्ता की कुत्ताघसीटी शुरू

जनता को सिर्फ यह तय करना है कि वह इसे कितना और बर्दाश्त करेगी! बिगुल डेस्क करीब डेढ़ महीने तक चली देशव्यापी चुनावी नौटंकी अब आख़िरी दौर में है। ‘बिगुल’ का यह अंक जब तक अधिकांश पाठकों के हाथों में पहुँचेगा तब तक चुनाव परिणाम घोषित हो चुके होंगे और दिल्ल
 
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar
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आप लिखते रहे , क्रांति अपने आप आयेगी......

ये बात मैं उन दिनों की कर रहा हूँ जब लड़कपन से निकल कर थोडा आगे की तरफ़ बढ़ा था, मुझे ये तो याद नहीं की लिखने का शौक ठीक ठीक कब शुरू हुआ था मगर शायद ये बीज मुझ में पनपने बहुत पहले ही जन्म ले चुके थे। शुरुआत बिल्कुल वैसे ही हुई थी जैसे आम तौर पर हम मे
 
ajay kumar jha