अंतिम क़िस्त से पहले दो तरही ग़ज़लें और
कल शाम तक अंतिम क़िस्त शाया हो जायेगी लेकिन अंतिम क़िस्त से पहले ये दो ग़ज़लें और मुलाहिज़ा कीजिए-पूर्णिमा वर्मनसब कुछ तेरे पास रे जोगीकाहे आज उदास रे जोगीमुशकिल रहना देस बेगानेअपना पर अभ्यास रे जोगीखाना, पानी, गीत बेगानेअपनी मगर मिठास रे जोगीदूर नगर में
May 26 2010 05:24 PM



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