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गंगावतरण भाग-३

गंगावतरण भाग-३                 – मनोज कुमार गंगावतरण भाग-१ गंगावतरण भाग-२ राजा सगर ने अपने साठ हजार पुत्रों को यज्ञ के घोड़े की खोज कर लाने का आदेश दिया। ये पुत्र यज्ञ के घोड़े की
 
मनोज कुमार
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झूठ बोले कौआ काटे

झूठ बोले कौआ काटे -- मनोज कुमार उस दिन सुबह सुबह दफ्तर पहुंचा तो माहौल विचित्र था। सीपी काफी तमतमाया हुआ इधर से उधर घूम रहा था और कुछ बड़बड़ाए जा रहा था। पी ए से पूछा तो मालूम हुआ कि सीट पर बैठते ही सीपी के हाथों के अर्दली ने ट्रांसफर आर्डर थमा दिया।
 
करण समस्तीपुरी
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गंगावतरण :: भाग-२

गंगावतरण :: भाग-२ मनोज कुमार (गंगावतरण की कथा :: भाग-१) श्रीमद भगवत में गंगावतरण की कथा है। प्राचीन काल की बात है। अयोध्‍या में इक्ष्‍वाकु वंश के राजा सगर राज करते थे। वे बड़े ही प्रतापी, दयालु, धर्मात्‍मा और प्रजा हितैषी थे। सगर का शाब्दिक अर्थ है विष
 
मनोज कुमार
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मनोज

समय के साथ -- मनोज कुमार पिताजी ने कहा था – “बेटा जब बड़ा आदमी बन जाना तो अपनी आत्मकथा लिखना।” इस पदोन्नति के बाद तो गौरव काफ़ी बड़े पोस्ट पर आ गया है। काफ़ी बड़ा अधिकारी हो गया है। दो साल पहले पिताजी गुज़र गए। उनकी इच्छा पूरी करनी है। तो अब अपनी आत्मकथा
 
करण समस्तीपुरी
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बरसात का एक दिन!

-- मनोज कुमारकलकत्ता में वर्षा झट से आती है और जमके बरसती है। उस दिन भी ऐसा ही हुआ। डेली यात्री के हाथ में बांए कंधे पर बैग और दाएं हाथ में छाता आवश्‍यक सामग्री है। धर्मतल्ला पर बस से उतरते ही जोर की वर्षा शुरू हो गई। जब तक छाता खोलते थोड़ा बहुत भींग ही
 
मनोज कुमार
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आज के दिन गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा था

आज के दिन गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा था-- मनोज कुमार यह पोस्ट हमारे ब्लॉग की 200वीं पोस्ट है। छह महीने से कुछ अधिक की इस यात्रा में हमें आपका उचित मार्गदर्शन और भरपूर सहयोग मिला। हमने अपनी तरफ़ से यह प्रयास किया कि हिन्दी ब्लॉग जगत को कुछ सार्थक रचनाएं
 
मनोज कुमार
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मनोज

चिठियाना-टिपियाना संवाद : अध्याय - 4-- मनोज कुमार उस दिन चिठियाना बहुत उदास बैठा था। पता नहीं किस उलझन में था.... । छदामी लाल ने उदासी का कारण जानना चाहा....। लेकिन उदास चिठियाना ने कुछ जवाब नहीं दिया। तभी टिपियाना का आविर्भाव हुआ। आज अपने चिर-सखा को
 
मनोज कुमार
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बुढ़ापा

-- मनोज कुमारदेवी मां के दर्शन के लिए पहाड़ की ऊँची चढ़ाई चढ़ कर जाना होता था। सत्तर पार कर चुकी उस वृद्धा के मन में अपनी संतान की सफलता एवं जीवन की कुछेक अभिलाषा पूर्ण होने के कारण मां के दरबार में शीष झुकाने की इच्‍छा बलवती हुई और इस दुर्गम यात्रा पर
 
करण समस्तीपुरी
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त्यागपत्र : भाग 20

पिछली किश्तों में आप पढ़ चुके हैं, "राघोपुर की रामदुलारी का परिवार के विरोध के बावजूद बाबा की आज्ञा से पटना विश्वविद्यालय आना ! रुचिरा-समीर और प्रकाश की दोस्ती ! फिर पटना की उभरती हुई साहित्यिक सख्सियत ! गाँव में रामदुलारी के खुले विचारों की कटु-चर्चा !
 
करण समस्तीपुरी
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अपशकुन

(स्थल - अस्पताल के प्रसुति गृह के सामने का बरामदा।) दृश्य-1 मिसेज खन्ना – (मिसेज सलूजा के उतरे हुए चेहरे को देख कर) क्या हुआ बहन जी? कुछ उदास दिख रही हैं। मिसेज सलूजा - पोते की आस लगाये थी। बहू ने बेटी पैदा किया है। मिसेज खन्ना – अरे! तो क्या हुआ? दिल
 
करण समस्तीपुरी
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22 मार्च - विश्‍व जल दिवस के अवसर पर

22 मार्च - विश्‍व जल दिवस के अवसर पर जान लेंसूखती जा रही है धरा कीदिन ब दिन गिर रहा है स्तर जल काकरें कल्पना उस पल काजब समस्या होगी विकट पृथ्वि पर होगा जल का संकटलोग होंगे हैरानहालात से परेशानबस रह जएगा केवल निशानभयावह है आने वाला कल इसी लिये आज से ही
 
मनोज कुमार
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बाधा

-- मनोज कुमारवृद्ध भूचारण देवी गांव की हवेलीनुमा मकान में भूतपूर्व महाराज की तरह कैदी जीवन व्यतीत करने को विवश हैं। एकमात्र पुत्र अपनी एकमात्र पत्नी एवं पुत्र के साथ शहर में हैं। मां-बाप तो बच्चों का नाम भी बहुत सोच समझ कर ही रखते हैं। भूचारण देवी औऱ
 
करण समस्तीपुरी
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त्याग पत्र : भाग 16

पिछली किश्तों में आप पढ़ चुके हैं, "राघोपुर की रामदुलारी का परिवार के विरोध के बावजूद बाबा की आज्ञा से पटना विश्वविद्यालय आना ! फिर रुचिरा-समीर और प्रकाश की दोस्ती ! रामदुलारी अब पटना की उभरती हुई साहित्यिक सख्सियत है ! गाँव में रामदुलारी के खुले विचारों
 
करण समस्तीपुरी
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बंटवारा

बंटवारा -- मनोज कुमार बंटवारा तो जैसे कुदरत का नियम ही है। आर्थिक रूप से पिछड़े समाज में, पिता के गुज़रते ही पुत्रों में संपत्ति (चल-अचल ) का बंटवारा तो एकदम तय है। पर जीवन बाबू की जिंदगी में ऐसी नौबत ही नहीं आई। रेलवे में पूछताछ लिपिक की नौकरी से जो
 
करण समस्तीपुरी
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अच्छे मौक़े का इल्म

-- मनोज कुमारकभी-कभी वक़्त हमसे बहुत आगे निकल जाता है और हम उसे तलाशते रह जाते हैं। आज एक ख़ास दिन है। जब सारे संसार में यह दिन एक विशेष अवसर के रूप में मनाया जा रहा है तो बात तो कुछ ख़ास होगी ही इस दिन में। इस अवसर पर एक कहानी सुनाने का मन कर रहा है। हमने
 
करण समस्तीपुरी
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सेबी के एजीएम के लॉकर में मिले एक करोड़ रुपए

शेयर बाजार की नियामक संस्‍था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के कोलकाता कार्यालय में सहायक महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत आर पी सिंह के एक लॉकर में से 1.29 करोड़ रुपए से ज्‍यादा नकद राशि बरामद हुई है। पूरे ब्‍यौरे के लिए यहां क्लिक करें।
 
मोलतोल
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जिम्मेदारी

-- मनोज कुमार बॉस ने कल शाम ही कहा था ‘सुबह, .. शार्प एट टेन थर्टी तुम प्रजेंटेशन मुझे दिखाओगे।’ देर रात तक जागकर उसने अपने लैप टॉप पर प्रजेंटेशन के स्लाइड्स तैयार किए थे और इतना खुश था कि बॉस इसे देखेंगे तो उसका कैश अवार्ड तो पक्का ! उसी रोज़ दोपहर बाद
 
करण समस्तीपुरी
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त्यागपत्र : भाग ---11

-- मनोज कुमार इस से पहले आपने पढ़ा, "तमाम विषमताओं के बावजूद गाँव की रामदुलारी पटना विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर उत्तीर्ण कर पीएच.डी. कर रही है। डॉ. रुचिरा पाण्डेय, समीर और प्रकाश जैसे विश्वस्त मित्रों के साथ वह साक्षरता, नारी-शिक्षा,
 
करण समस्तीपुरी
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विश्‍व विटप की डाली पर

नमस्कार ब्लोगर बन्धु-गण ! महज तीन महीने हुए.... और हमने ब्लॉग पर पोस्टों का शतक पूरा कर लिया। इस शतकीय सफ़र में आपका सहयोग, सुझाव, आकांक्षा आशीर्वाद, पाठकीयता और शुभ-कामनाओं का स्थान सर्वोपरी है। आपकी सृजनात्मक प्रतिक्रया हर कदम पर हमारी रचनात्मक ऊर्जा
 
करण समस्तीपुरी
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चिठियाना-टिपियाना संवाद

--- मनोज कुमारऊ साल जाते-जाते अउर ई साल आते-आते छदामी लाल को तीन ऐइसन पोस्ट मिल गया पढ़ने के लिए कि उनका त मने तृप्त हो गया। एकठो पुरुष चिट्ठाकार का अउर दोसर एकठो महिला चिट्ठाकार का और बीच में तेसर एक ठो मंच की चर्चा। तीन्नो पढ़के छदामी एतना तृप्त हो गये
 
मनोज कुमार
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मनोज

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़कीजब से ब्लॉग की दुनियां से जुड़ा हूं मुझे कई ब्लॉगों पर न जाने कितनी बार पसंद के कई गीत सुनने को मिले हैं। आज अपने पुराने गीतों के कलेक्शन से मुझे मेरे पसंद का एक गीत आपको सुनाने का मन कर रहा है। ये हमारे स्कूल-कॉलेज के दिनों
 
मनोज कुमार
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मजे करो! नाबालिग से विवाह अपराध नहीं

किसी नाबालिग लड़की से निकाह करना अपराध नहीं होगा क्यों कि इस परिस्थिति में नाबालिग लड़की शारीरिक सम्बन्ध बनाने या माँ बनने के लिए पूर्णतः परिपक्व होगी. क्या मेरी बात आपको बकवास लग रही है?
 
संजय बेंगाणी
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दिल से लिखी गई रचना

मनोज कुमार हम जैसे मध्यमवर्गीय परिवार में जीने वालों को और खासकर जिनका साहित्य से लगाव हो, विभिन्न प्रकार की समस्यायों का सामना करना पड़ता है। हम कई चीज़ों से तालमेल बिठाते हुए लेखन कार्य कर पाते हैं। दफ़्तर का कामकाज, उसका दवाब तो रहता ही है। सृजन क
 
करण समस्तीपुरी
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ब्लेसिंग

मनोज कुमार “ में आई कम-इन सर? ” “ यस कम इन। ” “ गुड मार्निंग सर। ” “ मार्निंग ” “ कैन आई सिट सर? ” “ ओह यस-यस प्लीज ।..................अरे तुम ? अगर तुम अपने ट्रांसफर की बात करने आए हो, तो सॉरी, तुम जा सकते हो। ” “ नहीं सर मैं तो...आपके...........। ”
 
करण समस्तीपुरी
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कोलकाता की दुर्गा पूजाः आइए देखें माता दुर्गा के ये देशज और विदेशज रूप

पिछली पोस्ट में आप से वायदा किया था कि पंडालों की सैर कराने के बाद आपको दिखाऊँगा देवी दुर्गा की प्रतिमाओं के देशज और विदेशज रूप..। कोलकाता के कारीगर पंडालों की प्रारूप चुनने में तो मशक्कत करते ही हैं पर साथ ही देवी दुर्गा को भिन्न रूपों में सजाने पर
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समझदारी

मनोज कुमार सरिता ने अपने बच्चों की परवरिश के लिए अपनी ज़रूरतों को हमेशा ही पीछे हटा दिया। इन बच्चों के चक्कर में सरिता वह सब भूल गई जो सपने हर एक कुंवारी लड़की अपने यौवन के दिनों में सजाती है। वो सजना, वो संवरना, गहने-कपड़े, पाउडर-क्रीम, मेकअप, सब भू
 
करण समस्तीपुरी
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कोलकाता पूजा पंडालों की सैर : बिष्णुपुर की टेराकोटा कला और फिल्म निर्देशक गौतम घोष का कमाल...

पिछली पोस्ट में आपने देखा लत्तरों से बना इगलू वो भी एक पूजा पंडाल के रूप में। पर अगर दुर्गा माँ बर्फीले प्रदेशों के इगलू में विराजमान हो सकती हैं तो कुछ ऊँचाई पर लटकते बया के घोसले में क्यूँ नहीं! विश्वास नहीं हो रहा तो बादामतला (Badamtala) की इन तसव
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ये मेरा जीवन एकाकी

मनोज कुमार ये मेरा जीवन एकाकी। नित - नित नूतन रूप तुम्हारा, देखूं मैं तो हारा - हारा। कभी उर्वशी, कभी मेनका, लगो परी तुम इन्द्र सभा की। ये मेरा जीवन एकाकी। डालो एक नज़र है काफी, अंतिम सफ़र अभी भी बाक़ी। मैं पीऊं तुम मुझे पिलाओ, पल भर को बन जाओ साक़ी।
 
करण समस्तीपुरी
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कोलकाता के अद्भुत पूजा पंडाल : क्या आपने देखा है हरा भरा इगलू (Igloo) और डोकरा (Dokra) शिल्प कला

पिछली पोस्ट में आप से वादा किया था कि कोलकाता की दुर्गापूजा के कलात्मक पक्ष को सामने रखने के लिए आपको वहाँ के नयनाभिराम पंडालों की सैर कराऊँगा। इस कड़ी में आज एक ऐसे पंडाल की ओर रुख करते हैं जिसका प्रारूप झारखंड, बंगाल और उड़ीसा में रहने वाले आदिवासियो
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बिहारी समझ बैठा है क्या ?

मनोज कुमार आजकल मैं सभ्य दिखने लगा हूँ। असभ्य तो मैं पहले भी नहीं था , पर दिखता नहीं था। अब दिखता हूँ इसका अहसास मुझे अपनी पिछली दिल्ली यात्रा पर हुआ। दिल्ली विमान पत्तन से पूर्व भुगतान टैक्सी में सवार हो जब साउथ ब्लाक के लिए चला तो एक लाल सिग्नल पर
 
करण समस्तीपुरी
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चित्र पहेली 10 : खा गए ना चकमा! जिन्हें आप सचमुच की इमारत समझ रहे थे वे थे कोलकाता के पूजा पंडाल......

इस बार की चित्र पहेली में कोलकाता के शिल्पकारों ने पाठकों को ऐसा दिग्भ्रमित किया की पहेली में दिखने वाली इमारतों को आप सभी सचमुच का मान बैठे। दरअसल इन नकली हवेलियों द्वारा शिल्पकारों ने कोलकाता के पुराने स्वरूप का चेहरा दिखाने की कोशिश की थी। मौका था
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दोराहा

मनोज कुमार १ पति पत्नी डायनिंग टेबुल पर खाना खा रहे हैं। रेडियो पर मुकेश का एक गाना, “मुझे नहीं पूछनी तुमसे बीती बातें, कैसे भी गुज़ारी हों तुमने अपनी रातें” आ रहा है। पत्नी, “खाना कैसा बना है?” पति, “बहुत अच्छा!” पत्नी, ”तुम कितने अच्छे हो, तुम्हें
 
मनोज कुमार
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झींगुर दास

जब मैंने इस ब्लॉग पर काम करती मां को पोस्ट किया था, तभी से मेरे जेहन में यह था कि लोग झींगुर दास से भी मिलना चाहेंगे। उस रचना में बार-बार झींगुर दास का जिक्र हो रहा था। उस रचना की जो भी प्रतिक्रियाएं मिलीं, श्री गिरिजेश राव जी ने झींगुर दास की वर्तमा
 
MANOJ KUMAR
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सचिन पर बाउन्सर मत फेंको ..

मनोज कुमार सचिन तेंदुलकर को मराठी पत्र “सामना” के माध्यम से एक मराठी राजनेता द्वारा कहा गया है कि “सचिन को इस तरह का बयान देकर नो बॉल पर सिंगल लेने की ज़रूरत नहीं थी। ऐसे बयान देकर मराठी मानुषों की पिच पर वह आउट हो गए हैं। ... ... सचिन क्रीज छोड़कर र
 
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बिखरी चीज़ें

मुझे वे घर जहां हर चीज़ों के लिए निर्धारित जगह और हर चीज़ें अपनी जगह पर होती हैं बड़ा दमघोटू लगता है। ऐसे घर में पहुंचते ही मुझे पाक़ीज़ा फिल्म का वह डायलॉग “पांव जमीन पर मत रखना मैले हो जाएंगे” स्मरण हो जाता है। ... चीज़कों को हाथ मत लगाना, गंदी हो
 
MANOJ KUMAR
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लघुकथा सब प्रायोजित है

प्रफुल्ल बाबू वो मेरिट लिस्ट में नहीं आ पाई।” प्रफुल्ल बाबू का चेहरा जो अब तक प्रफुल्लित था, थोड़ा मुरझाया, फिर तमतमाया और तैश में वे बोले, “॥ तो ... तो.. मैंने ही कौन मेरिट के आधार पर आपकी कविताएं रिकॉर्ड की थी ..?” अब मुझे जूस का स्वाद कड़वा लग रहा
 
MANOJ KUMAR
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महज एक ट्रेन नहीं, संस्कृति भी है मेट्रो

देश की पहली मेट्रो रेल शनिवार यानी 24 अक्तूबर को अपने सफर के 25 साल पूरे कर लिए हैं. वर्ष 1984 में इसी दिन पहली मेट्रो ट्रेन ने कोलकाता में धर्मतल्ला से भवानीपुर तक की दूरी तय की थी. अपनी चौथाई सदी के सफर में इस भूमिगत सेवा ने महानगर के लोगों की रहन-
 
प्रभाकर मणि तिवारी
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त्याग पत्र

शहर के कई सार्वजनिक महोत्सवों में उन्होंने अपने भाषण की मौलिकता और वक्पटुता से श्रोतागण को सदा ही मुग्ध किया है। किन्तु साहित्य और खासकर हिन्दी साहित्य से उन्हें दूर - दूर का संबंध नहीं था , सिवाय इसके कि उनकी होनेवाली अर्द्धांगिनी हिन्दी से स्नातकोत
 
MANOJ KUMAR
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कब टूटेगी ये बेरी !

नमस्कार मित्रों ! फिर जम गयी है चौपाल। आज चौपाल में हम बात करेंगे हमारी बेरियों की। बेरी जो कब से जकर रक्खी हमें। हमारी संस्कृति को। हमारी अभिव्यक्ती को। जी हाँ ! हम कर रहे हैं, भाषिक बेरी का। वो बेरी जिसमें आजादी के दशकों बाद भी हमारी रोज मर्रा की ज
 
MANOJ KUMAR
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एक गहरी श्‍वांस लेकर

मित्रों ! आपका प्यार और आपकी प्रतिक्रया ही हमारी रचनात्मक ऊर्जा का संबल है। 'एक गहरी श्वांस ले कर' ब्लॉग जगत में आगे बढ़ने के लिए एक बार फिर हम तैयार हैं। प्रतीक्षा है आपके सहयोग और सुझाव की ! --- मनोज कुमार एक गहरी श्वांस लेकर ! मैं अंधेरे में खड़ा
 
MANOJ KUMAR